अनमोल वचन

 
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हे प्रभो मुझे इस योग्य बनने की शक्ति प्रदान करे कि दूसरों को जितना स्नेह मैं प्रदान कर सकूं उतने स्नेह की आकांक्षा अपने लिए न करूं, क्योंकि दूसरों को देकर ही हम प्राप्त करते हैं, दूसरों को क्षमा करके ही हम क्षमित होते है, मरकर ही दिव्य जीवन के लिए उत्पन्न होते हैं। हे प्रभो मुझमें वहीं दिव्य जीवन पाने की इच्छा है, वह मुझे प्राप्त हो। हे प्रभो मुझे वह सद्बुद्धि प्रदान करो कि मैं अस्त के पथ से सुपथ की ओर जाऊं, जो मार्ग हमें भटकाते हैं, जीवन के लक्ष्य से दूर ले जाते हैं, उस मार्ग से हमें बचाईए, जिस मार्ग पर चलने से हमारी उन्नति हो, हम सुखी हो, प्रसन्न हो, शांत हो, आनंदित हो, हे प्रभो वही मार्ग हमें प्राप्त हो। हे प्रभो मुझे सदा ही अपने समीप रखना आपसे एक पल को भी दूर न हो पाऊं, क्योंकि जो खेत सिंचाई साधन से दूर छोर पर हो, वह सदा शुष्क रहता है, किन्तु जो सिंचाई साधन के समीप हो वह सदा हरा-भरा रहता है। ऐसे ही जो मनुष्य आपसे दूर रहता है, सदा दुखी रहता है, परन्तु प्रभो जो आपके निकट है वह सदा सुखी, प्रसन्न और शोभित रहता है।

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