अनमोल वचन

 
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आज विजयदशमी (दशहरा) पर्व धूमधाम से मनाया जायेगा। इस पर्व पर हम बड़े-बड़े मैदानों में रावण के ऊंचे-ऊंचे पुतले बनाते हैं और उसे अग्रि में भेंट करते हैं, जलाते हैं। क्या हमने कभी विचार किया अथवा यह सोचने का प्रयास किया कि पुतले रूपी रावण को क्यों जलाते हैं। एक साधारण इंसान भी कहेगा कि उसने भगवान राम का विरोध किया, अधर्मी आचरण किया, इसलिए हम युगो-युगो से हर वर्ष जलाते आ रहे हैं, परन्तु आपने रावण के गुणों पर भी कभी विचार किया ?,   रावण शास्त्रों का ज्ञाता था, वेदों का विद्वान था, बहुत बड़ा वैज्ञानिक था, परन्तु ज्ञान होते हुए भी उसने मर्यादा का उल्लंघन किया, अभिमान किया, अहंकारी हो गया। इस कारण हम आज रावण को इस दृष्टि से देखते हैं। हमें ज्ञान हो जाना चाहिए कि निरन्तर धर्म स्थानों पर हाजरी दे देने से, धर्म शास्त्रों को याद कर लेने से धर्मात्माओं की श्रेणी में नहीं आ जाते, हम सच्चे धार्मिक है या नहीं यह हमारे कर्म, हमारे आचरण निश्चित करेंगे। इसलिए ज्ञान होने के बावजूद जो धर्म और मर्यादाओं का पालन नहीं करता वह रावण की श्रेणी में आ जाता है।

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