अनमोल वचन

 
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आना-जाना, जन्म-मृत्यु से सब काल द्वारा नियंत्रित क्रियाएं प्रतिक्रियाएं हैं, जो आयेगा, उसका जाना निश्चित है। जो गया है, वह आयेगा भी, किस रूप में आयेगा, यह बात अलग है, किन्तु काल जो चला गया वह पुन: लौटकर नहीं आयेगा। काल स्वनियंत्रित है, अबाध है। मानव ने उसे बांधने का बहुत प्रयास किया, पल-घड़ी से लेकर मनवन्तर और कल्प में किन्तु काल नहीं बंधा, कभी ठहरा नहीं। काल अमूल्य है, उसके मूल्य को उसके महत्व को जानने का पहचानने का प्रयास तो अवश्य करना चाहिए, जो काल के महत्व को नहीं जानते, प्रभु के दिये इस अमूल्य वरदान को व्यर्थ के कार्यों में नष्ट कर देते हैं, काल उन्हें क्षमा नहीं करता, अधोगति को पहुंचा देता है, फिर पछताते रहो, हाथ मलते रहो, प्राप्त कुछ भी नहीं होगा। ऐसे अज्ञानी को तो असफलताओं की गुमनामी की अंधेरी गलियों में सड़ते रहने होगा। कोई उनका नाम लेने वाला भी नहीं मिलेगा। आइये आज  प्रात: बेला में यह संकल्प लें कि काल (समय) के एक क्षण को नष्ट नहीं करेंगे। पल-पल का सदुपयोग कर अपने कल्याण के प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे। प्रभो सबको सद्बुद्धि प्रदान करें।

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