अनमोल वचन

 
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प्रभु प्राप्ति हेतु जो मार्ग व दिशा आपको अपने दिव्य संस्कारों से प्राप्त हुई है उस मार्ग व दिशा पर निरन्तर चलते रहना होगा। अभ्यासी बनना होगा। अभ्यास के बिना मार्ग से भटक जाओगे। अभ्यास आत्म विश्वास देगा, जिससे निर्भय होकर आगे बढ़ सकेंगे। आप तो दृढ संकल्पी हो आपको रोकने का साहस किसमें हैं। आप इस मार्ग पर अकेले नहीं हैं। प्रभु सदैव साथी और सखा के रूप में आपके साथ रहता है। एक बात सदैव स्मरण रखें कि आत्म साक्षात्कार दृढ संकल्पी ही कर सकते हैं। मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति छोटी सी बाधा को पार करने में अपने को असमर्थ पाकर उस मार्ग को ही छोड़ देते हैं। आत्म साक्षात्कार ही प्रभु प्राप्ति का मुख्य सोपान है। सच्चे साधक का संकल्प देखकर प्रभु स्वयं ही मार्ग दर्शक बन जायेंगे। संसार की प्रत्येक वस्तु में परमेश्वर के दर्शन होने लगेंगे। तृण का तिनका भी आत्मा का उपदेश करने लगेगा।

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