जीवन में आ रही परेशानी को दूर करने के लिए मकर संक्रांति पर करें इन चीजों का दान, होगा लाभ

 
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 हिंदू धर्मशास्त्र में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि मकर संकांति से ही हिंदू धर्म के पर्वों की शुरूआत होती है। ज्योतिषियों की माने तो यदि सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में सूर्य अस्त पश्चात जाते तो मकर संक्रांति अगले दिन 15 जनवरी को मनाई जाती।
मकर संक्रांति किसी तिथि विशेष पर नहीं होती इस बार तो द्वादशी को है। कभी अष्टमी को तो कभी और तिथियों में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। जहां तिथि प्रधान त्यौहार होता है वह सूर्यदिनी तिथि प्रभावशाली होता है लेकिन मकर संक्रांति तिथि प्रदान नहीं बल्कि अंतरिक्ष में होने वाली सौरमंडल में घटना है। इसलिए जरूरी नहीं कि यह 14 जनवरी को ही मनाई जाए।
विशेष समस्याओं के लिए करें इस मकर संक्रांति पर निम्न दान :— -
बेरोजगारी, नेत्र दोष व बीमारियों के लिए लाल कपड़ा, सवा किलो गेहूं, लाल रंग की मिठाई व दक्षिणा दी जानी चाहिए। मानसिक अशांति दूर करने के लिए सफेद कपड़ा, कपूर, घी, दही व दक्षिणा दान करें। पित्त व क्रोध की अधिकता है तो इससे छुटकारा पाने के लिए मसूर की दाल, गुड, सौंफ, शहद व दक्षिणा दान दें। व्यापार हानि, वाणी दोष, त्वचा व दंत रोग के लिए हरा कपड़ा, सवा किलो मूंग, कांसा दान करें। पढ़ाई में बाधा, वैचारिक मतभेद दूर करने के लिए पीले रंग के कपड़े, हल्दी, सफेद सरसों, सवा किलो चने की दाल व दक्षिणा दें।  
विवाह में बाधाएं, पति पत्नी कलह को दूर करने के लिए सफेद रंग के कपड़े, चन्दन, चांदी, सवा किलों चावल व दक्षिणा दान करें। वायु विकार, पैरों से सम्बन्धित बीमारी व बाधा को खत्म करने के लिए काले रंग का कपड़ा, सवा किलो काली उड़द, सरसों का तेल, लोहे की कोई वस्तु व दक्षिणा दीजिए।
ये हैं मकर संक्रांति पर दान-स्नान पूजन शुभ मुहूर्त :
14 जनवरी, शुक्रवार
सूर्य मकर प्रवेश : दोपहर 2:29 बजे से
पुण्य काल : प्रातः 8ः05 बजे से
संक्रान्ति पर्व काल : शाम 5:09 बजे तक
महा पुण्य काल : अपरान्ह 2:41 से 4:25 बजे तक
लाभामृत योग : प्रातः7:30 से 10:30 बजे तक
अभिजित युक्त शुभ योग : दोपहर 12:30 से 1:30 बजे
अशुभ समय-राहु काल दिन :   11:12 – 12:30 बजे तक

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