शनि जयंती पर ऐसे प्रसन्न करें भगवान सूर्य के पुत्र शनिदेव को

 
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मेरठ। गुरूवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस बार गुरूवार को होने के कारण शनि जयंती का महत्व और अधिक बढ जाता है। गुरूवार को ही सूर्य ग्रहण और वट सावित्री व्रत भी है। गुरूवार को शनि जयंती होने के कारण सूर्य देव के सुपुत्र श्री शनिदेव की अराधना का विशेष महत्व हो जाता है। शनिदेव की पूजा वैसे तो प्रत्येक शनिवार को की जाती है परंतु शनि जयंती पर की गई शनि की पूजा विशेष फलदाई मानी जाती है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। ज्योतिषाचार्य अनिल कुमार के अनुसार कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 जून बुधवार को दिन में 1:19 पर लगेगी और 10 जून गुरुवार को दिन में 3:16 तक रहेगी। जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन पूजन से पितृ दोष का निवारण भी होता है।
ज्योतिष अनिल शास्त्री ने बताया कि शनि जयंती के पावन पर्व पर व्रत उपवास रखकर शनिदेव की पूजा अर्चना करने से कठिनाइयों का निवारण होता है। साथ ही सुख समृद्धि और खुशहाली भी मिलती है। श्रद्धालु व्रत कर्ता को प्रातः काल स्नान ध्यान वह अपने आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना के बाद शनि व्रत का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही संपूर्ण दिन निराहार रहकर व्रत करना चाहिए। सायं काल पुनः स्नान कर शनिदेव का श्रंगार कर उनकी विधि-विधान पूर्वक पूजा करने के बाद काले रंग की वस्तुएं जैसे-काला वस्त्र काला साबुत उड़द, काला तिल, सरसों का तेल या तिल का तेल, काला छाता, लोहे का बर्तन एवं अन्य काले रंग की वस्तुएं अर्पित करना लाभकारी रहता है। इस दिन शनि देव के मंदिर में सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करना तथा तेल की अखंड ज्योत जलाना उत्तम माना गया है। सायं काल शनिदेव के मंदिर में पूजा करके दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। सायं काल शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करने का विधान माना गया है। पूजा-अर्चना और दान करने से शनि जनित कष्टों का निवारण होता है। शनि देव शीघ्र प्रसन्न होकर व्रत की मनोकामना को पूर्ण कर सुख सौभाग्य में अभिवृद्धि करते हैं। जिन्हें जन्म कुंडली के अनुसार शनि ग्रह प्रतिकूल हो या शनि ग्रह की महादशा अंतर्दशा प्रत्यंतर दशा शनि ग्रह की लड़ाई अथवा साढ़ेसाती हो उन्हें आज के दिन व्रत रखकर शनिदेव की पूजा का संकल्प लेकर शनिदेव की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना करके लाभान्वित होना चाहिए।

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