योगी सरकार के खिलाफ आरोप गैरजिम्मेदाराना: नागरिक समूह

 
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नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण की अगुवाई में समाज के 151 गणमान्य लोगों ने आज एक खुला पत्र जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ कुछ पूर्व नौकरशाहों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में कहा कि ऐसे आरोप गैर जिम्मेदार और पूरी तरह से गलत हैं।

पत्र में कहा गया है कि पूर्व नौकरशाहों और नागरिक समूहों के लोग सोचते हैं कि जो वे कह रहे हैं, वही सही है। जबकि उत्तर प्रदेश के मामले में यही लोग चुनिंदा तरीके से विचारों को पेश करते हैं।

पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व भारतीय प्रशासनिक, विदेश, पुलिस सेवा और सेना के अधिकारियों सहित नागरिकों के एक समूह ने श्री योगी पर लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दबाकर असंतोष को ‘कुचलने’ का आरोप लगाने वालों की आलोचना की।

समूह ने आरोप लगाया कि यह चिंता का विषय है कि सेवानिवृत्त लोक सेवकों का एक समूह गैर-राजनीतिक होने का दावा करने के बावजूद ‘एक विशेष राजनीतिक धारा से जुड़ा हुआ है और वे भारतीय लोकतंत्र, इसकी संस्थाओं और वैध रूप से उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को खराब रोशनी में दिखाने के लिए हर मौके का बार-बार लाभ उठाता है और ऐसा करने के लिए वे बिना सोचे समझे सार्वजनिक बयान देते हैं।

इस पत्र के समर्थन में 151 लोगों के हस्ताक्षर हैं जिनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण, सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई ) के पूर्व निदेशक नागेश्वर राव के अलावा कई सेवानिवृत्त और सैन्य अधिकारी शामिल हैं।

इस समूह ने पूर्व लोक सेवकों और गणमान्य लोगों के एक अन्य समूह के बयानों का खंडन किया है जो उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार का समर्थन करने वाले समूह ने आंकड़ों के हवाले से कहा कि 20 मार्च-2017 से 11 जुलाई-2021 के बीच राज्य में पुलिस के साथ कुल 8,367 मुठभेड़ हुई, जिनमें 18,025 कथित अपराधी घायल हुए। उनमें से 3246 को गिरफ्तार किया गया जबकि 140 की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत है कि मरने वाले 140 में से अधिकांश अल्पसंख्यक समुदायों से थे। इनमें 51 अल्पसंख्यक समुदाय के थे। इन मुठभेड़ों में 13 पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं, और 1,140 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि मजिट्रेट जांच से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देश के रूप में निगरानी तंत्र काम कर रहा है। 11 जुलाई तक पुलिस के साथ हुई 140 मुठभेड़ों में से जिनमें मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए थे, उनमें से 96 मुठभेड़ों के मामले में जांच रिपोर्ट जमा कर दी गई है और 81 रिपोर्टों को अदालतों ने स्वीकार कर लिया है। इनमें से सभी मुठभेड़ मामले सही पाए गए।”

पत्र में दावा किया गया है कि संविधान की रक्षा की आड़ में उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ उनके आलोचनात्मक आरोपों वाले हालिया बयान गैर-जिम्मेदार और पूरी तरह से गलत है । राजनीतिक एजेंडा समूह ने झूठे आरोप लगाने के दौरान तथ्यों को बहुत गलत तरीके से लिया है और उनका विश्लेषण अनुचित था।

नागरिकता संशोधन कानून के मसले पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को सही ठहराते हुए पत्र में कहा गया है कि जब प्रदर्शन के नाम पर हिंसा होने लगे, तो कानून को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए और उत्तर प्रदेश पुलिस ने कार्रवाई करके कुछ भी गलत नहीं किया है।

पत्र में सिद्दीकी कप्पन की गिरफ्तारी, उपद्रवियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने और कोरोना की दूसरी लहर के दौरान योगी सरकार के कामकाज का भी समर्थन किया गया है। गणमान्य लोगों ने उम्मीद जताई है कि पूर्व नौकरशाह और समाज से जुड़े लोग इस तरह बेवजह आरोप लगाने से बाज आएंगे।

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