मुंबई पुलिस पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह हैं भारत में, सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

 
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नयी दिल्ली,- उच्चतम न्यायालय ने अवैध वसूली एवं अन्य आरोपों से घिरे कई महीनों से फरार मुंबई पुलिस के निलंबित पूर्व आयुक्त परम बीर सिंह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए संबंधित मामलों की जांच में शामिल होने का सोमवार को आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान उनके वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि परम बीर सिंह भारत में ही हैं। मामले की जांच में सहयोग के लिए 48 घंटे में उपलब्ध हो सकते हैं।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने परम बीर सिंह को राहत प्रदान करने से संबंधित आदेश के साथ ही केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया।
पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता परम बीर सिंह द्वारा तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए 'आरोप और झगड़े' चिंताजनक हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने परम बीर सिंह की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पूर्व पुलिस आयुक्त ने अपनी गिरफ्तारी से राहत के साथ-साथ शीर्ष अदालत से गुहार लगाई थी कि वह पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने का आदेश सरकार को जारी करें।
परम बीर सिंह का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील पुनीत बाली ने सुनवाई के दौरान पीठ से गिरफ्तारी से राहत की गुहार लगाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पर लगे तमाम आरोप मनगढ़ंत हैं। उनके मुवक्किल निर्दोष हैं। श्री बाली ने याचिकाकर्ता के विदेश भागने की अटकलों पर विराम लगाते शीर्ष अदालत से कहा कि पूर्व पुलिस आयुक्त भारत में हैं और 48 घंटे में जांच के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

शीर्ष अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 06 दिसंबर को करेगी।
न्यायालय ने पिछली सुनवाई 18 नवंबर को परम बीर सिंह की गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया था।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 1988 बैच के इस भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी की याचिका 16 सितंबर को खारिज कर दी थी। गत बुधवार को मुंबई की एक अदालत द्वारा पूर्व पुलिस आयुक्त को भगोड़ा घोषित करने के बाद उनकी ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर अवैध रूप से 100 करोड़ रुपए मांगने का गंभीर आरोप लगाने के बाद लगातार विवादों एवं एक होटल व्यवसायी से अवैध उगाही के समेत छह आरोपों से घिरे आईपीएस सिंह कई महीनों से लापता हैं।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने एक रेस्टोरेंट्स और बार मालिक से करोड़ों रुपए अवैध रूप से मांगने के आरोप के आधार पर पूर्व पुलिस आयुक्त एवं अन्य के खिलाफ 20 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में निलंबित निलंबित मुंबई पुलिस के निरीक्षक सचिन वाजे के अलावा पांच अन्य लोगों पर उगाही मांगने के गंभीर आरोप हैं।
पुलिस ने इस मामले में सचिन वाजे के अलावा अन्य आरोपियों- सुमित, अल्पेश को गिरफ्तार किया था, लेकिन परम बीर फरार हैं । प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पूर्व पुलिस आयुक्त लापता हैं।
गत बुधवार को मुंबई के एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुधीर भाजीपाल ने अपराध शाखा की मांग पर निलंबित पूर्व पुलिस आयुक्त को भगोड़ा घोषित कर दिया था।
महाराष्ट्र के दूसरे सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के लापता होने के बाद उनके विदेश भागने की अटकलें भी लगाई जा रही है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 18 नवंबर को राहत देने से इनकार करते हुए उनके वकील से सवाल क्या था कि याचिकाकर्ता परम बीर भारत में है या दुनिया में कहीं और? जब तक अदालत को पता नहीं चलेगा और पेश नहीं होंगे तब तक पीठ उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी।
पूर्व पुलिस आयुक्त के वकील ने इस संबंध में पीठ को आज जवाब देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने सोमवार के लिए सुनवाई सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था।

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