अठारह वर्ष से अधिक उम्र के हर नागरिक को मुफ्त टीका, राज्यों की जिम्मेदारी खत्म : मोदी

 
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नयी दिल्ली- कोरोना महामारी से निपटने के लिए देश भर में चलाये जा रहे टीकारण अभियान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केन्द्र सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लेते हुए 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को मुफ्त टीका लगाने का ऐलान किया और राज्यों को टीका खरीदने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया।
इसके अलावा केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष कोरोना की पहली लहर के बाद घोषित की गयी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का फायदा दूसरी लहर के बाद भी लोगों को देने के लिए इसकी अवधि दीपावली तब बढाने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में ये घोषणा की।
उन्होंने कहा, “ आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। आगामी 21 जून सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी।”
श्री मोदी ने कहा , “ वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी । देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा।
अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत, प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी।”
उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।

श्री मोदी ने कहा कि यह निर्णय राज्यों की मांग और सुझावों पर ही लिया गया है क्योंकि जब राज्यों को टीकाकरण से संबंधित वास्तविक स्थिति का पता चला तो उन्होंने पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग करनी शुरू कर दी। राज्यों की इस मांग पर विचार किया गया और इसके आधार पर ही पुरानी व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया गया।
इससे पहले उन्होंने इस निर्णय की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा , “ इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया। यह भी कहा गया कि कि वैक्सीनेशन के लिए एज ग्रुप क्यों बनाए गए?”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा,सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे?
प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार टीकाकरण जैसे कार्यक्रम जिससे करोड़ों देशवासियों की जान बचायी जानी है उसको लेकर किसी तू तू मैं मैं में नहीं पड़ना चाहती और इसीलिए राज्यों को टीका खरीदने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।
दूसरी बड़ी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा , “ देशवासियों टीकाकरण के अलावा आज एक और बड़े फैसले से मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं। पिछले साल जब लॉकडाउन लगाना पड़ा तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ देशवासियों को 8 महीने तक मुफ्त राशन दिया गया। दूसरी वेव के कारण मई और जून के लिए भी ये योजना बढ़ाई गई। आज सरकार ने फैसला लिया है कि इस योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ उसका साथी बनी है। नवंबर तक 80 करोड़ गरीबों को तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। मेरे किसी भी गरीब भाई-बहन को, उसके परिवार को भूखा नहीं सोना पड़ेगा।”

  संबोधन के शुरू में श्री मोदी ने कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति के का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा , “ बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। ”
देश में विभिन्न टीकाकरण कार्यक्रमों की स्थिति की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा ,“ वर्ष 2014 में टीकाकरण 60 प्रतिशत था लेकिन हमने पांच-सात साल में ही वैक्सीनेशन कवरेज 60% से बढ़ाकर 90% तक पहुंचा दिया। हमने वैक्सीनेशन की स्पीड और दायरा दोनों बढ़ा दिया। बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कई नए टीकों को अभियान का हिस्सा बनाया। हमें हमारे देश के बच्चों की चिंता थी, गरीब की चिंता थी, गरीब के बच्चों की चिंता थी, जिन्हें कभी टीका लग ही नहीं पाया। हम सही तरह से आगे बढ़ रहे थे कि कोरोना वायरस ने हमें घेर लिया। देश ही नहीं दुनिया के सामने फिर पुरानी आशंकाएं घिरने लगीं कि भारत कैसे इतनी बड़ी आबादी को बचा पाएगा। जब नीयत साफ होती है और नीति स्पष्ट होती है और निरंतर परिश्रम होता है तो नतीजे भी मिलते हैं। हर आशंका को दरकिनार करके भारत में एक साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो मेड इन इंडिया वैक्सीन लॉन्च कर दी।”
कोरोना की वैक्सीन पर उन्होंने कहा , “ कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने 1 साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो मेड इन इंडिया वैक्सीन्स लॉन्च कर दी। हमारे देश ने, वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नही है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है। ”
टीकाकरण अभियान की आगे की स्थिति पर उन्होंने कहा , “ पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है। ”
उन्होंने कहा कि कोरोना जैसे अदृश्य और रूप बदलने वाले दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी हथियार कोविड प्रोटोकॉल है। कोरोना की वैक्सीन के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा , “ इस लड़ाई में वैक्सीन सुरक्षा कवच की तरह है। पूरी दुनिया में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां गिनी-चुनी हैं। अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो भारत जैसे विशाल देश में क्या होता। पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन हासिल करने में दशकों लग जाते थे। वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था, तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था। पोलियो, स्मॉल पॉक्स, हैपेटाइटिस बी की वैक्सीन के लिए देशवासियों ने दशकों तक इंतजार किया था।”

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