भूले नहीं हैं लखीमपुर खीरी हिंसा : राकेश टिकैत

 
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नई दिल्ली। लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वह 21 जनवरी को लखीमपुर खीरी जाकर पीड़ित किसानों से मुलाकात करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि वह किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ 21 जनवरी को तीन-चार दिनों के लिए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जाएंगे। वहां पर पीड़ित किसानों से मुलाकात करेंगे।

टिकैत ने शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा को भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह किसानों के साथ वहां जाएंगे और हालत की समीक्षा करेंगे। टिकैत ने कहा कि वह लखीमपुर खीरी जाकर जेल में बंद किसानों से भी मुलाकात करेंगे।

इस दौरान किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर सरकार का रवैया ठीक नहीं है। अभी तक केंद्र ने एमएसपी पर न तो कोई समिति बनाई है और न ही इस पर किसान संगठनों से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी कांड में शामिल केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को सरकार ने अभी तक नहीं हटाया है। युद्धवीर ने कहा कि अगर सरकार हमारी मांगों का जवाब नहीं देगी तो हम 31 जनवरी को ''विरोध दिवस'' मनाएंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल तीन अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया गांव में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों को गाड़ी से कुचलने की घटना सामने आई थी। इस हिंसा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस हिंसा में सात किसान, एक पत्रकार और तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।

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