यूपी में टिकटों की सूची हुई फाइनल, आज दिल्ली में होगी कोर ग्रुप की बैठक, 13 को होगा अंतिम फैसला 

 
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नई दिल्ली, । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उम्मीदवारों के संभावित नामों पर विचार करने के लिए मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में यूपी कोर ग्रुप के नेताओं की बड़ी बैठक केंद्रीय नेताओं के साथ होने जा रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होनी वाली इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह , केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी एल संतोष और उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महासचिव सुनील बंसल भी मौजूद रह सकते हैं।

आपको बता दें कि मंगलवार को दिल्ली में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश की चुनाव समिति द्वारा भेजी गई गई उम्मीदवारों की लिस्ट पर विचार किया जाएगा। बैठक में एक-एक विधानसभा सीट के सभी समीकरण और उम्मीदवारों के संभावित नामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इस बैठक में राज्य इकाई द्वारा भेजे गए नामों के अलावा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा विभिन्न सर्वे और माध्यमों से जुटाए गए नामों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। पहले चरण में चुनाव होने वाले 58 सीटों के साथ ही दूसरे चरण में जिन 55 सीटों पर चुनाव होना है , उन पर भी मंगलवार की बैठक में विचार किया जा सकता है।

मंगलवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के  बाद पार्टी मुख्यालय में ही भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी जिसमें इन नामों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। बताया जा रहा है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 13 जनवरी को हो सकती है।

 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोमवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर चुनाव समिति की बैठक हुई। पार्टी की इस महत्वपूर्ण बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य समेत 24 सदस्यीय समिति के अन्य सदस्य भी शामिल हुए।

चुनाव समित की बैठक में 2022 जीतने पर चर्चा हुई। पार्टी के दिग्गजों ने टिकटार्थियों को लेकर चर्चा की। पार्टी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा विधायक हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्हीं विधायकों को टिकट दिया जाएगा, जिनका बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। जिन विधायकों की रिपोर्ट अच्छी नहीं है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों का फीडबैक उनके क्षेत्रों से जुटाया है। उसके आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। सोमवार को हुई बैठक में पार्टी के चुनावी अभियान से लेकर टिकट बंटवारे तक के मुद्दे पर चर्चा हुई है। जिलों से आए नामों के पैनल में छटनी करते हुए तीन नामों के पैनल को केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उम्मीदारों के नाम के  चयन की एक लम्बी प्रक्रिया है। उस पर निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व ही लेगा। टिकट का बंटवारा प्रदेश नेतृत्व नहीं करेगा।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहां से विधान सभा का चुनाव लड़ेंगे , इसे लेकर सस्पेंस अभी तक बना हुआ है, लेकिन बताया जा रहा है कि चुनावी घमासान को लेकर भाजपा ने एक बड़ी रणनीति पर अमल करने का फैसला कर लिया है। 

 मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा ने सैद्धांतिक तौर पर यह फैसला कर लिया है कि वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को विधान सभा के चुनावी मैदान में उतारेगी। आपको बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश भाजपा के ये तीनों ही दिग्गज नेता विधान परिषद के सदस्य हैं, लेकिन अगर भाजपा ने अपने फैसले पर अमल किया और जनता ने इन्हें चुना तो ये 10 मार्च के बाद विधान सभा सदस्य के रूप में भी शपथ लेते नजर आएंगे।

भाजपा के एक बड़े नेता ने  बताया कि योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज और लोकप्रिय नेता के विधान सभा चुनाव में उतरने का फायदा पार्टी को उस सीट विशेष के साथ-साथ अगल-बगल की दर्जनों विधान सभा सीटों पर भी मिलना तय है।

योगी आदित्यनाथ इससे पहले कभी भी विधान सभा का चुनाव नहीं लड़े हैं। 2017 में मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लगातार 5 बार लोक सभा के सांसद चुने जा चुके हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि वो गोरखपुर जिले की ही किसी सीट से लड़ सकते हैं, लेकिन हाल ही में भाजपा राज्य सभा सांसद हरनाथ सिंह यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर उन्हें मथुरा से चुनाव लड़वाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि पार्टी के कई नेता उन्हें अयोध्या तो कई पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लड़वाने की सलाह भी दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य अपनी पुरानी सीट सिराथू से ही विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं वहीं राज्य के दूसरे उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा अतीत में राजधानी लखनऊ के मेयर रह चुके हैं इसलिए पार्टी उन्हें यहीं से लड़ाने पर विचार कर रही है।

उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया से जुड़े पार्टी के एक दिग्गज नेता ने  बताया कि पार्टी के पास कई माध्यमों से राज्य की सभी विधानसभाओं की रिपोर्ट आ रही है, लेकिन किस सीट से किन्हें उम्मीदवार बनाया जाएगा, इस बारे में पार्टी की राज्य चुनाव समिति की सिफारिश के आधार पर पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति दिल्ली में बैठक कर अंतिम फैसला करेगी।

पार्टी नेता ने बताया कि क्षेत्र विशेष के समीकरण को देखते हुए भाजपा योगी सरकार के कई ऐसे मंत्रियों को भी चुनावी मैदान में उतार सकती है, जो वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं।

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