शादी के बाद पति-पत्नी दोनों रखें, एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल

 
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आज के मशीनी युग में और इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पति हो या पत्नी, दोनों को एक दूसरे की इच्छा और पसंद नापसंद के बारे में वक्त निकाल पाना थोड़ा मुश्किल काम हो गया है, खासकर श्त्रदी के बाद जब Óपति-पत्नी' दोनों या फिर इनमें से कोई एक नौकरी करता हो तो।
 अक्सर आज के माहौल में देखा जाए तो श्त्रदी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव आने लगता है। इस तनाव को दूर कैसे करें? इसके लिए हम आपको कुछ महत्वपूर्ण सुझ्त्रव दे रहे हैं।
अपने दफ्तर के कार्यों को जहां तक हो सके, दफ्तर में ही पूरा करें:-
आजकल हम देखते हैं कि ज्यादातर पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू मसले पर विवाद होता है तो इनमें से किसी एक को आपने यह बात कहते हुए सुना होगा कि यह ऑफिस नहीं, आपका घर है। बात तब आगे बढ़ती है, जब आप में से कोई भी अपने दफ्तर की फाइल वगैरह पूरी करने के लिए घर ले आते हैं।
इसका मुख्य कारण यह है कि आज हर कोई पति-पत्नी यही चाहते हैं कि वे एक दूसरे के साथ बैठकर कुछ बातें करें, साथ में घूमने-फिरने जायें और श्त्रम को मार्केट में खरीदारी वगैरह भी एक साथ ही करें। ऐसी कई इच्छाएं या शौक हैं जिनमें पति-पत्नी परस्पर एक दूसरे का सहयोग चाहते हैं।
कोई भी खरीदारी पति-पत्नी साथ मिलकर करें:-
अगर आप लोगों में से कोई कुछ खरीदना चाहता है जैसे पत्नी के लिए साड़ी, गहने या सौंदर्य प्रसाधन की कोई सामग्री अथवा पति के लिए कोट-पैंट, शर्ट, जूते, मोजे, टाई, बेल्ट वगैरह आप एक दूसरे की पसंद के खरीदें। अगर आपकी पत्नी आपके लिए कोई डेऊस अपनी पसंद की खरीद रही हैं तो आप भी उनको साड़ी, गहने आदि अपनी पसंद के खरीद कर दें। इससे एक दूसरे की पसंद-नापसंद के बारे में पता चलेगा और संबंधों में मधुरता आती है और प्यार बढ़ता है।
अपनी छुट्टी के दिनों में किसी प्राकृतिक सौंदर्य' वाले स्थान पर घूमने जायें:-
आप दोनों पति-पत्नी अपने श्त्रदीशुदा जीवन में कुछ नयापन लाने के लिए, किसी प्राकृतिक सुंदरता वाली जगह जैसे समुद्र के किनारे, खूबसूरत पहाड़ी स्थल, नदियां, झरने आदि को देखने जायें जहां पर कुछ प्रेमी-प्रेमिका या नवविवाहित जोड़े आते हों। इससे आपकी जिंदगी की नीरसता दूर होगी और आपका रिश्ता भी मजबूत होगा।
घर-परिवार से संबंधित निर्णय अकेले ही न करें:-
अगर आपको कोई नया फ्लैट खरीदना हो, कार खरीदनी हो या कोई पर्सनल लोन बैंक से लेना हो तो फिर इन सभी महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने से पहले अपने जीवनसाथी से भी राय लेनी चाहिए क्योंकि पति-पत्नी दोनों ही जीवन रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं। बिना दोनों पहियों के परस्पर सहयोग के बिना यह गाड़ी अर्थात जीवन नहीं चल पाता है।
अपने स्वास्थ्य एवं जीवन का बीमा करायें:-
अपने स्वास्थ्य एवं जीवन के बारे में सचेत रहें। हो सकता है, आज आप अच्छी तरह से हैं लेकिन ईश्वर न करे कल आप बीमार पड़ गये और इलाज के लिए पैसों की जरूरत पडऩे पर आपके पास पैसे नहीं हैं तो फिर ऐसे में आप दोनों अगर अपनी कमाई का कुछ पैसा अपनी किसी हेल्थ इंश्योरेस कंपनी का प्रीमियम भरने के लिए करें तो आप दोनों पति-पत्नी को इलाज के लिए पैसों की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी।
स्वास्थ्य बीमा के अलावा आप अपने जीवन का भी बीमा करायें क्योंकि अचानक अगर आप में से किसी एक की असमय मृत्यु हो जाये तो यह आपके जीवन-साथी के लिए कुछ हद तक मददगार होगा। आप अपनी मेहनत एवं सूझ-बूझ से अपने भविष्य को सफल बनाने के लिए अभी से कोशिश करें। एक धार्मिक ग्रंथ का यह वचन सत्य ही कहा गया है-
जब तक वृद्धावस्था दूर है, इन्द्रियों का नाश नहीं हुआ है और शरीर में ताकत है, तब तक मनुष्य को अपने आत्म-कल्याण के लिए महान प्रयत्न कर लेना चाहिए वरना घर में आग लग जाने पर कुआं खोदने से क्या फायदा होगा।'
- मूलचन्द विश्वकर्मा

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