सुखद दांपत्य को कंटकीय बना डालता है मधुमेह

 
1
मधुमेह अर्थात् डायबिटिज एक ऐसा रोग है जो सुखद यौन जीवन को कंटकीय  बना डालता है। मधुमेह रोग जैसे जैसे पुराना  होता जाता है, वैसे-वैसे वह स्त्री-पुरूष दोनों के ही यौन संबंधों में खलल डालने लग जाता है। इस रोग से पीडि़त पुरूषों में इसके कारण  यौन शक्ति की निर्बलता  पनपने लगती है जबकि मधुमेही स्त्रियों में इसके कारण यौन संबंधों के प्रति सक्रियता नहीं रह जाती है अर्थात् उनमें काम (सेक्स) के प्रति उदासीनता के लक्षण पनपने लग जाते हैं।
मधुमेह रोग में यौन विषमताएं दो कारणों से विकसित होती हैं। एक तो लम्बे समय तक अनियंत्रित मधुमेह की दशा यानी अति ग्लूकोज रक्तता (हाइपरग्लाइसीमिया) बनी रहने से शारीरिक अंगों के कार्यों में दोष आने लगता है। इससे एक तरफ संक्र ामक रोगों को बढ़ावा मिलता है तो दूसरी तरफ अंग विशेष से संबंधित रक्तवाहिनियों और स्नायु तंत्रिकाओं में भी विकार उत्पन्न होने लगते हैं।
यौनांगों के स्थानीय संक्र मण से यौन  सम्पर्क के समय अत्यधिक पीड़ा  होने लगती है। जननेंद्रियों से संबंधित रक्त धमनियों के कठोर और संकरी हो जाने अर्थात् उनके काठिन्यीकरण (एथिरोक्लोरोसिस) से कामोत्तेजना के समय जननांगों में पर्याप्त मात्र में रक्त का संचार नहीं हो पाता। फलत: जननेेन्द्रियों में पूर्ण तनाव नहीं आ पाता।
मधुमेह केे कारण स्वैच्छिक प्रकार की स्नायु तंत्रिकाओं में विषमताएँ उत्पन्न हो जाने से न तो जननेंद्रियों से संबंधित पेशियों को सक्रिय कर पाती है और न ही जननेंद्रिय के तनाव और वीर्य के स्खलन को पर्याप्त समय तक रोक पाती हैं। मधुमेह रोगियों पर दूसरा प्रभाव मानसिक कारणों से उत्पन्न हुई विषमताओं का पड़ता है।
जैसे-जैसे अनियंत्रित मधुमेह के कारण रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे रोगी का समस्त शरीर ही शक्तिहीन और निस्तेज बनने लगता है। इस दशा में शारीरिक कमजोरी, आलस्य, मन की उदासीनता और उत्साह की कमी के कारण व्यक्ति की यौन इच्छा दब-सी  जाती है। अगर इस अवस्था में पुरूष यौन प्रक्रिया के प्रति जुट भी जाता है तो भी मानसिक दशा के कारण उसकी जननेंद्रिय में सामान्य तनाव नहीं आ पाता। स्त्रियों में तो कामशीतलता का एक प्रमुख कारण मानसिक कामोत्तेजना का अभाव ही माना जाता है।
पुरूषों की जननेंद्रिय सामान्य अवस्था में शिथिल नहीं रहती। कामेच्छा के जागृत होने पर मस्तिष्क, सुषुम्ना (स्पाइनल कॉर्ड) के माध्यम से जननेंद्रिय से संबंधित स्नायु तंत्रिकाओं को सन्देश देकर जननेंद्रिय को यौन समागम के लिए तैयार होने की प्रेरणा देता है। इस अवस्था में तंत्रिकाओं से प्रेरित जननेंद्रिय की मांस-पेशियों में रक्त का संचार तीव्र होकर उनमें संचय होने से शिथिल जननेंद्रिय में तनाव आ जाता है और वह सख्त होकर अपने स्वाभाविक आकार में बढ़ जाती है परन्तु मधुमेह की अवस्था में यह सारी की सारी प्रक्रि या गड़बड़ा जाती है।
अनियंत्रित मधुमेह के परिणाम स्वरूप स्नायु तंत्रिकाओं में विकार उत्पन्न हो जाने से मस्तिष्क और जननेंद्रिय के मध्य संवेदना सूचनाओं और प्रतिवर्त क्रियाओं का आपसी सामंजस्य बिगड़ जाता है। इस कारण जननेंद्रिय से संबंधित मांसपेशियों पर तंत्रिकाओं का सामान्य नियंत्रण नहीं रह पाता। इसी तरह मधुमेह के कारण रक्त धमनियों के कठोर और आन्तरिक व्यास में संकरी हो जाने से रक्त का प्रवाह पूर्ववत् सामान्य नहीं रह पाता। फलत: कामोत्तेजना के समय भी जननेन्द्रिय में पर्याप्त रक्त का संचार नहीं हो पाता। इन दोनों ही विषमताओं का परिणाम यह निकलता है कि जननेंद्रिय में आधा-अधूरा ही तनाव आ पाता है या फिर जननेंद्रिय में आया तनाव शीघ्र ही कमज़ोर पड़ जाता है अथवा तनाव बिलकुल भी नहीं आ पाता।
मधुमेह रोगियों में यौन संबंधी एक और समस्या आम देखी जाती है जैसे कि कुछ रोगियों में जननेंद्रिय का तनाव तो सामान्य रूप में आता है पर स्नायु तंत्रिकाओं की उत्तेजना बढ़ी होने के कारण उनका वीर्य के स्खलन पर पूरा नियंत्रण नहीं होता, अर्थात् इन रोगियों में स्नायु तंत्रिकाओं के विकारग्रस्त रहने के कारण  शीघ्रपतन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मधुमेह रोगियों में यौन विकार का एक और प्रमुख कारण है उनका मानसिक तनावग्रस्त बन जाना। ऐसा देखा गया है कि अनियंत्रित मधुमेह में रोगी की मानसिक हालत ठीक नहीं रह पाती। ऐसे रोगी शीघ्र परेशान होने वाले, शंकालु स्वभाव, शीघ्र क्रोधित और अधिक चिंता करने वाले बन जाते हैं। ऐसी अवस्था में उनके मस्तिष्क में 'डोपामिन' जैसे तंत्रिका न्यूरोट्रांसमीटर्स को अपने ऊपर संयम बरतकर ही यौन  संबंध बनाये रखना हितकर होता  है।  
- आनंद कुमार अनंत

From around the web