रोना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है

 
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शायद आपको इस बात पर ताज्जुब हो कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए आंसू भी बहुत आवश्यक हैं। मनोवैज्ञानिकों का मत है कि भावनाओं और विचारों में कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन्हें अभिव्यक्त करना हानिकारक होता है लेकिन उन्हें दबाने से तनाव की स्थिति निर्मित होती है। ऐसी स्थिति में उससे बचने का बेहतर तरीका यह है कि भावनाओं को दूसरे रूप में अभिव्यक्त होने दिया जाए। रोकर आंसुओं द्वारा अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति की जा सकती है। समय-समय पर रोना सेहत के लिहाज से फायदेमंद है। अक्सर यह देखा जाता है कि महिलाएं पुरूषों की तुलना में कम तनावग्रस्त रहती हैं। इसका मूल कारण है कि वे पुरूषों की भांति भावनाओं और संवेगों को दबाती नहीं हैं और आंसुओं के जरिए अपने मन का सारा बोझ बाहर निकाल देती हैं। आंखों में आंसू न आने के कारण अनेक प्रकार की शारीरिक विकृतियां, जैसे-सांस नली में खुश्की, नाक का सूखा होना तथा सिर दर्द रहना आदि हो सकती हैं। आंसू के द्वारा अनेक अशुद्ध और व्यर्थ की चीजें बाहर निकल जाती हैं। आपको आश्चर्य होगा कि यदि पांच लिटर पानी में तीन चम्मच आंसू मिला दिए जाएं तो सारा पानी खारा हो जाएगा। आंसू न केवल आंखों को स्वच्छ रखते हैं बल्कि कीटाणुओं से सुरक्षा भी देते हैं। पाश्चात्य चिकित्सकों का मत है कि जिन व्यक्तियों की विकास प्रक्रि या में आंखों से कम आंसू निकलते हैं, वे जीवन की सभी अवस्थाओं में आमतौर पर जल्दी ही रोगों से ग्रस्त होते हैं और आसानी से स्वस्थ नहीं हो पाते। डॉक्टरों की राय है कि जिन बच्चों का विकास मानसिक रूप से समुचित नहीं होता है और बड़े होने पर प्राय: वे आक्र ामक प्रवृत्ति के निकलते हैं उनका भाव-संस्थान शुष्क पड़ जाता है और वे क्रूर होते हैं। प्राय: ऐसी धारणा प्रचलित है कि जन्म के पश्चात जो बच्चे रोते नहीं, उनके जीवित बच पाने की संभावना कम रहती है। जो बचते भी हैं उनका भली-भांति विकास नहीं हो पाता। हालांकि चिकित्सक अभी रोने के कारण समूचे शरीर पर होने वाले प्रभावों को ज्ञात नहीं कर पाये हैं किन्तु इतना अवश्य सिद्ध हो चुका है कि रोने से संपूर्ण शरीर प्रभावित होता है। पेट की मांसपेशियों तथा डायफ्राम तक पर इसका असर पड़ता है। विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि आमतौर पर रोने से किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं होती बल्कि कुछ न कुछ मानसिक व शारीरिक लाभ हीहोता है। आज की तेज रफ्तार से भागती-दौड़ती जिंदगी में दो पल बैठ कर मन का गुबार निकालने के लिए रोने में कतई हर्ज नहीं है चाहे खुशी के रूप में ही आंसू क्यों न बहाये हों। आंसुओं के जरिए आप अपने मन व शरीर का सारा तनाव हल्का कर सकते हैं इसलिए रोने में संकोच मत कीजिए। सेहत के लिए तो कम से कम आज जी भर के रो ही डालिए।
-अजय चांडक

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