वृद्धावस्था में स्मरण शक्ति बनाये रखने के चन्द उपाय

 
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युवावस्था पार करते ही अक्सर लोगों की स्मरण शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है और कुछ वर्ष बीत जाने के बाद कई बार इस सीमा तक गिर जाती है कि परिचितों का चेहरा पहचानना तक मुश्किल हो जाता है। आगन्तुक का  नाम भूल जाना, बातचीत का ढंग बदल जाना आदि परिवर्तन होने लगते हैं। वाद-विवाद में तर्क का अभाव रहता है तथा त्वरित निर्णय लेने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिसके कारण कभी-कभी आर्थिक हानि तक उठानी पड़ जाती है तथा हास्यास्पद स्थितियों का सामना करना पड़ जाता है।
हमारी मस्तिष्क की क्षमता हरे पदार्थों पर निर्भर करती है। आज के वातावरण के अनुसार हमने हरे पदार्थों को खाना छोड़कर रेडिमेड फास्ट फूड  की ओर ध्यान देना प्रारंभ कर दिया है। फलस्वरूप मस्तिष्क की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हुए बंजर बनती चली जा रही है। यही कारण है कि वृद्धावस्था आते-आते हमारी स्मरण शक्ति एकाएक शिथिल हो जाती है।
अभी हाल में हुए शोधों के फलस्वरूप ऐसे संकेत मिले हैं कि 'अल्जीमर्स' रोग के रोगियों के मस्तिष्कीय कोशों में अल्यूमीनियम का जमाव पाया गया है। यद्यपि अभी यह सिद्ध नहीं हो सका है कि अल्यूमीनियम का कोशों में जमाव क्यों होता है, फिर भी यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने के कारण अंश भोजन के साथ शरीर में प्रवेश करते चले जाते हैं और मस्तिष्क के कोशों पर इनका जमाव होने लगता है। यही द्रव्य धीरे-धीरे सठियापन के कारण बन जाते हैं, अत: अल्यूमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल भोजन पकाने, खासकर चाय बनाने में नहीं करना चाहिए।
मस्तिष्कीय कार्य क्षमता के लिये विटामिन 'बी' कांपलेक्स बहुत आवश्यक होता है क्योंकि इसके अभाव से स्मरण शक्ति घटती है। इसके अभाव में ध्यान केन्द्रित होने में कठिनाई होती है, दिग्भ्रमता बढ़ती है, विचारों में तालमेल नहीं हो पाता है तथा मस्तिष्कीय विकास रूक जाता है। निम्नांकित विटामिन 'बी' मस्तिष्कीय क्षमता वृद्धि के लिये अत्यन्त आवश्यक हैं।
थायमिन 'बी 1:- यह एक ऐसा विटामिन है जिसकी कमी से हाल ही में हुई घटनायें याद नहीं रहतीं जैसे यह याद नहीं रह पाता कि कल कौन-सी फिल्म टेलीविजन पर देखी थी, कल मुलाकात करने कौन आया था, कल घर में क्या-क्या भोज्य पदार्थ बना था आदि बातों का भी ठीक-ठीक ध्यान नहीं रह पाता है। अत्यधिक मदिरापान व अत्यधिक संभोग के दुष्परिणाम स्वरूप इस विटामिन की कमी हो जाती है। मोटे चावल, गेहूं, ज्वार और बाजरा में थायमिन 'बी'-1 की काफी मात्र प्राप्त होती है।
पाइरोडाक्सिन 'बी-6':- यह मस्तिष्क के लिये सबसे उपयोगी विटामिन है। इसकी कमी हो जाने से एक कोष से दूसरे कोष को संदेशा ले जाने वाले कोमल व बारीक छोटे प्रबंध जिन्हें 'डेन्ड्रान' कहा जाता है, प्रभावित होते हैं और इनसे निकली सूक्ष्म शाखायें जिन्हें 'डेन्ड्राइटस' कहा जाता है, सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण मस्तिष्क कार्य करने का सर्किट प्रभावित हो जाता है। यह विटामिन अंडे की जर्दी, खमीर, जिगर, गोश्त, अनाज व दालों, चुकन्दर व हरी सब्जियों में पाया जाता है।
विटामिन 'बी' 12:- इस विटामिन की कमी का कारण मुख्य रूप से अनीमिया का होना होता है जिसके कारण रक्त की कमी होने से ऑक्सीजन संवाहक क्षमता प्रभावित होती है जो मस्तिष्क की कार्य क्षमता को भी प्रभावित करती है। इसका एक मात्र स्रोत मांस पदार्थ जैसे-अंडे, जिगर, गुर्दे तथा कुछ सीमा तक दूध में भी पाया जाता है।  सोयाबीन का प्रयोग काफी लाभदायक होता है।
कोलिन:- यह भी विटामिन 'बी' समूह का एक सदस्य है जिसे बहुत उपयोगी होने के कारण मस्तिष्कीय खाद्य पदार्थ भी कहा जाता है । यह वह विटामिन है जिससे मस्तिष्क के पढऩे और स्मरण करने की शक्ति बढ़ती है। कोलिन की सहायता से 'एसिटिल कोलिन' का निर्माण होता है जो मस्तिष्क के एक कोष से दूसरे कोष तक संदेश वाहक का कार्य करती है।
जिन व्यक्तियों की स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है उन्हें कोलिन के सेवन से लाभ होता है। इसके साथ ही थायमिन और विटामिन 'बी' 12 का सेवन भी आवश्यक है, क्योंकि इनकी उपस्थिति में ही मस्तिष्क के मुख्य रसायन 'एसिटिल कोलिन' का उपयोग होता है। मछली, जिगर, अंडे व सोयाबीन तथा पनीर में 'कोलिन' की भरपूर मात्र पायी जाती है।
लेसीथिन:- यह वे पदार्थ हैं, जिनके सामान्य घटक व वसीय गुण होते हैं परन्तु इसके साथ-साथ फासफोरिक अम्ल और कोलिन की भी मात्र होती है। अध्ययनों व परीक्षणों द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि 'लेसीथिन' स्मरण शक्ति बनाये रखने में सहायक होती है और सठियायेपन की भी रोकथाम करती है। यह मस्तिष्कीय कोषों को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है। लेसीथिन युक्त खाद्य पदार्थ खाते रहने से कोष की झिल्ली की कठोरता बहुत देर में हो पाती है और मस्तिष्कीय कोषों की शक्ति काफी समय तक बनी रहती है। इस कारण 'डेन्ड्राइट' बहुत समय तक स्वस्थ बने रहते हैं। मक्खन, मक्का, दूध, जौ, सोयाबीन व अंडे 'लेसीथिन' के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
अन्य विटामिन:- राइबोफ्लेविन, फोलिक अम्ल तथा विटामिन 'सी' भी मस्तिष्क की क्षमता को बनाये रखने में उपयोगी पाये जाते हैं। राइबोफ्लेविन का मुख्य स्रोत दूध, मांस, अनाज व दाल होता है। खमीर में फोलिक अम्ल तथा हरी पत्तीदार साग-पात, अमरूद, संतरा, मीठा नंींबू, हरी मिर्च व आंवला में विटामिन 'सी' की भरपूर मात्र पायी जाती है।
मस्तिष्कीय कार्य कुशलता को बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि योजनाबद्ध तरीके से मस्तिष्क का उपयोग किया जाये क्योंकि यदि इसका उपयोग न किया जायेगा तो 'उपयोग करो अन्यथा खो दो' के सिद्धान्त पर मस्तिष्कीय क्षमता घटती चली जाती है, इस कारण निम्नांकित कार्यों को अनवरत करते रहना चाहिए:-
(क) व्यापक अध्ययन कीजिए ताकि मस्तिष्क का उपयोग होता रहे।
(ख) सीखने व समझने की प्रवृत्ति विकसित कीजिये।
(ग) विशिष्टता त्यागकर सामान्य व्यक्ति बने रहने का प्रयत्न कीजिये।
(घ) कुछ नया कार्य करने का प्रयास कीजिये।
(ड़) कभी खाली मत बैठिये, कुछ न कुछ करते रहिये।
- आनंद कुमार अनंत

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