पुरुषों में भी होती है रजोनिवृत्ति

 
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यह तनाव का जमाना है। कार्यभार, गला काट प्रतियोगिता, ट्रैफिक की धक्कमपेल, बढ़ती महंगाई और स्टेटस का भार, तिस पर उपभोक्तावादी संस्कृति का ग्लैमर, कुल मिलाकर दिमागी संतुलन बिगाडऩे के लिये बहुत हैं। ऐसे में किसी के लिए भी अवसाद का कारण जान पाना आसान नहीं।
स्त्रियों की तरह अधेड़ावस्था में पुरूषों को भी रजोनिवृत्ति जैसी स्थिति से गुजरना पड़ता है। यह एक ट्रांजीशनल पीरियड होता है जो समय के साथ ही गुजर भी जाता है। इस दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों को संवेदनशील, भावुक स्वभाव वाले पुरूष समझ न पाने के कारण तनाव  और शंकाओं से भर उठते हैं। वे नहीं जानते उन्हें क्या साल रहा है। स्थिति से अनजान उन्हें हर चीज का नकारात्मक पहलू ही नजर आता है। उनका वो रोमांटिक स्वरूप पत्नी के लिये पिछले जन्म की बात जैसे लगने लगता है।
पति के खीझ भरे चिड़चिड़े स्वभाव का शिकार सबसे ज्यादा पत्नी ही बनती है या फिर बेटे, जो जवानी में कदम रख चुके होते हैं, उसे अपने प्रतिद्वंदी लगने लगते हैं। दो पाटों के बीच में पिसती है बेचारी पत्नी। जरा-जरा सी बात पर  पति का गुस्सा शूट कर जाता है। हर समय का तनाव बीमारियों को निमंत्रण देता है जिसमें ज्यादा कॉमन हैं  उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियां।
 इस समय होने वाली हारमोन्स की गड़बड़ी तथा रसायनिक परिवर्तन पुरूष को बेचैन किए रखते हैं।
इसी समय ज्यादातर विवाहेत्तर संबंधों की शुरूआत होती है। ऊब से भरा पुरूष कुछ नया करना चाहता है लेकिन इन संबंधों की हकीकत क्या होती है, यह उसके सिवाय और लोग खूब समझते हैं। यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह पूरी तरह इससे अनजान रहता है लेकिन अपने दुराग्रहों के कारण या स्वार्थवश इसे स्वीकारना नहीं चाहता।
एक सफल सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जीवनसाथी के प्रति वफादारी जरूरी है जो इस तरह के विवाहेत्तर संबंधों से खत्म हो जाती है। हल्का-फुल्का फ्लर्टेशन जीवन रंगीन बनाता है लेकिन अपनी हदों में ही। फिर, इस स्थिति से कैसे उबरा जा सकता है।
अकेलापन इस समय आपके अहित में होगा। अपने को किसी न किसी कार्य में लगाये रखें। रिटायरमेंट के बाद तो यह और भी जरूरी है। अच्छी नींद, हल्का भोजन रेग्युलर एक्सरसाइज सुबह की सैर जरूरी है।
 हंसना हमारे लिये महत्त्वपूर्ण है इसीलिए आज बड़े-बड़े शहरों में लाफिंग क्लब खुल गए हैं ताकि आप उसके महत्त्व को भूल न जाएं जैसा कि वास्तव में हो रहा है। चुटकुले पढ़ें और औरों को भी सुनायें और उन पर दिल खोल कर हंसें। न्यूजपेपर के अलावा भी कुछ पढ़ें, ऐसा जो स्वस्थ मनोरंजन करे, नॉलेज बढ़ाए। कोई भी हॉबी जरूरी होनी चाहिए जिसमें आपका मन रमे।
अपनी लड़ाई तो आपको स्वयं ही लडऩी है। दूसरा उसमें कितना साथ देगा। जहां पत्नी से आशाएं हैं, आपके भी कर्तव्य हैं। अपना खीझ का टारगेट उसे बनाने की गलती न करें जैसा कि अक्सर देखने में आता है। पत्नी को ईश्वर ने औरत होने के नाते सहनशील बनाया है लेकिन उसका अनुचित फायदा कभी न उठाएं।
- उषा जैन 'शीरीं'

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