घरेलू विषयों में बच्चों को भी शामिल करें !

 
N
कई लोगों का मत है कि बच्चों को घरेलू समस्याओं से क्या लेना देना। अभी तो उनके खाने खेलने के दिन हैं। समस्याओं से जूझने के लिए तो सारा जीवन है लेकिन यह सोच क्या सही है? ऐसा करने से क्या भविष्य में वह उत्तरदायित्वों को समझने वाला व्यक्ति बनेगा?
बच्चों को शुरू से ही घर की समस्याओं के प्रति जागरूक बनाएं ताकि वे कम से कम अपनी गैरजरूरी मांगें रखकर उनमें और इजाफा तो न करें। जैसे बच्चा साइकिल के लिए जिद करता है किंतु मेहमान आ जाने के कारण आपका बजट गड़बड़ा गया है और आप साइकिल लेने में असमर्थ हैं तो यह बात उसे समझाने से वह जरूर समझ जाएगा। फिर भविष्य में ले देने का आश्वासन दिया जा सकता है।
सलीम के अब्बू कॉलेज में प्रोफेसर हैं। बच्चों की परवरिश वे सलीके से करने में विश्वास रखते हैं। बेटे से वे हमेशा आप कहकर ही बात करते हें। किशोरावस्था का सलीम अभी इतना समझदार नहीं हैं जितना वह अपने को समझने लगा है। उदाहरण के लिए सस्ता मिलने के कारण उसके अब्बू ने एक मकान खरीद लिया। बाद में पता चला कि पीछे कसाईवाड़ा होने के कारण वहां बदबू आती है। बस सलीम साहब अड़ गये अब्बूजी, मकान फौरन बेच दीजिए।' अब्बू समझाते रहे प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त इतनी आसान नहीं कि तुरंत फैसला ले लिया जाए। हफ्ता भी नहीं गुजरा होगा कि कोर्ट से ऑर्डर हो जाने के कारण कसाईवाड़ा वहां से हटा दिया गया।
बच्चों में सोच की वह परिपक्वता कहां जो बड़ों में होती है। उन्हें दुनिया का गहरा तजुर्बा होता है जो बच्चों को समय के साथ ही प्राप्त होता है। राय देने के बजाए इस उम्र में उन्हें यह देखना है कि बड़े समस्याओं को कैसे सुलझाते हैं। इस समय अगर वे समस्याओं को समझने की कोशिश करेंगे तो भविष्य में जरूर इस काबिल हो जाएंगे कि उन्हें अपने अनुभव के आधार पर सही ढंग से सुलझा सकें।
दरअसल वे अभिभावक जो मानते हैं कि बच्चों को घरेलू समस्याओं की भनक तक नहीं होनी चाहिए उनके प्रति अपराध हैं। बच्चों को अंधेरे में रखना उनके प्रति नाइंसाफी है। फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में वे आपको समझते हुए आपका साथ देंगे। आपसे अपनत्व और स्नेह रखेंगे। निकट के रिश्तों में दुराव छुपाव नहीं होना चाहिए क्योंकि हो सकता है बड़े होकर वे समस्याओं का सामना करने के बजाए उनकी अवहेलना करने लगे।
कई बार देखा गया है बच्चा मम्मी पापा की मदद करना चाहता है लेकिन वे 'अभी तुम छोटे हो कहकर उसे हतोत्साहित कर देते हैं। यह सरासर गलत है। बच्चों को अपने ढंग से मदद करने दें। इससे वे प्रोत्साहित होंगे। उनमें भी अहम् होता है जो संतुष्टि चाहता है।
बच्चों को बचत करना सिखायें। उन्हें पैसे का महत्व समझायें। याद रखें वे भी घर के सदस्य हैं इसलिए उन्हें घरेलू समस्याओं से अनभिज्ञ न रखें। एक उम्र के बाद हो सकता है उन्हें भी वैसी ही समस्याओं से दो चार होना पड़े।
बचपन से ही उनके और अपने बीच पूर्ण विश्वास का रिश्ता बनाएं। समस्याएं उनके साथ डिस्कस करने से जहां उन्हें जिम्मेदारी का अहसास होगा, वहीं जिम्मेदारी की भावना भी जन्म लेगी।
-  उषा जैन शीरी'

From around the web