चटपटे चुटकुले

 
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पहला कैदी: शक्लें भी खूब धोखा देती हैं। एक बार एक साहब मुझे दिलीप कुमार समझ बैठे।
दूसरा कैदी: ठीक कह रहे हो, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, मुझे देखकर एक जनाब जवाहर लाल नेहरू का धोखा खा गये।
तीसरा कैदी: अजी यह तो कुछ भी नहीं, मैं जब चौथी बार जेल पहुंचा तो जेलर बोला हे भगवान, तू फिर आ गया।

एक प्रोफेसर साहब की कुछ ज्यादा ही सोचने की आदत थी। साथ ही कंजूस भी बहुत थे। एक बार वे अपने मित्र से बात कर रहे थे, मैं पैट्रोल की बढ़ती हुई कीमत से चिंतित हूं।
मित्र: तुम्हारे पास न कार है न ही स्कूटर। फिर तुम्हें पैट्रोल की कीमत से क्या मतलब?
प्रोफेसर: मेरा लाइटर तो पैट्रोल से ही चलता है।

महेश: तो तुम कितने पढ़े-लिखे हो।
रमेश: मैं एलएलएम हूं।
महेश: किन्तु तुम्हारे पिताजी ने तो कहा था कि तुम मैट्रिक पास हो।
रमेश: जी उन्होंने सही कहा था। इसका मतलब है लटक-लटक के मैट्रिक पास।

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