कहीं आप पति की अपेक्षाओं की उपेक्षा तो नहीं कर रहीं

 
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सफल और सुखी दांपत्य जीवन की सबसे बड़ी शर्त होती है कि पति और पत्नी दोनों एक दूसरे की अपेक्षाओं को पूर्ण करें। सुखी दांपत्य जीवन प्यार और संवेदनाओं पर आधारित होता है। एक सफल जीवन साथी वही है जो अपने जीवन साथी की भावनाओं को सम्मान दे, उसका ख्याल रखे, उसके प्रति उदासीनता न बरतें और अपने प्यार से उसके जीवन में खुशियां ही खुशियां भर दें।
आज व्यक्ति की दिनचर्या इतनी व्यस्त हो गई है कि वह इन सब का महत्त्व ही भूल गया है। पति-पत्नी के बीच में प्राय: संवादशून्यता की स्थिति देखने को मिलती है और दोनों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है। विवाह के प्रारंभिक दिनों में जो खुशी, उल्लास पति-पत्नी दोनों में होता है, वह विवाह के कुछ महीनों बाद कम होने लगता है और धीरे-धीरे वह खुशी उदासीनता में परिवर्तित होने लगती है। विवाह के दो-तीन वर्ष बाद तो उनकी जिंदगी में घर के काम, ऑफिस जाना, बच्चों की जिम्मेदारियां मात्र रह जाती हैं और वे गृहस्थ जीवन जी नहीं रहे होते बल्कि ढो रहे होते हैं।
वैसे तो पति-पत्नी दोनों गृहस्थी के दो पहिए हैं पर नारी गृहस्थी की रीढ़ है और अपने गृहस्थ जीवन में इस नीरसता को आने से बचा सकती है अगर वह पति की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर उनको पूरा करने की कोशिश करें।
घर की जिम्मेदारियों को निभाना तो पत्नी का कर्तव्य है पर इनसे घिर कर पति को नजरअंदाज न करें। कई बार देखने को मिलता है कि पत्नी बच्चे में इतनी व्यस्त हो जाती है कि पति की जरूरतों के प्रति लापरवाह हो जाती है, इसलिए पत्नी को चाहिए कि वह पति की जरूरतों को ध्यान में रखे ताकि पति उपेक्षित महसूस न करें।
पति के ऑफिस से लौटते ही बच्चे की शिकायत या सास की शिकायतों का पिटारा खोल कर न बैठ जाएं। शाम को थका हारा लौटा पति आप पर झुंझला जाएगा कि अभी मैं लौटा हूं और तुम्हारा रोना-धोना शुरू हो गया।
ऑफिस से आए पति का स्वागत हंसते मुस्कुराते करें। आपका हंसता मुस्कुराता चेहरा उनकी थकावट दूर कर देगा।
पति से उनके दिन भर के अनुभवों को बांटें। इससे पति को आपके रूप में अच्छा दोस्त नजर आएगा जो जिंदगी के हर क्षेत्र में उसके साथ है।
कभी-कभी रात को डिनर लेने बाहर जाएं। इससे आप दोनों को कुछ समय घर गृहस्थी के झंझटों से दूर शांति से काटने को समय मिलेगा।
अपने सौंदर्य के प्रति लापरवाही न बरतें। अच्छे कपड़े पहनें और हल्का मेकअप करके रहें ताकि आपके पति का आकर्षण आपमें बना रहे। घर पर रहने का अर्थ यह नहीं कि आप सही ढंग से तैयार भी न रहें।
सेक्स वैवाहिक रिश्ते की अनिवार्य आवश्यकता है। जब भी इस रिश्ते में नीरसता आती है, उसका प्रभाव आपके वैवाहिक संबंधों पर भी पड़ता है, इसलिए इस ओर उदासीनता न बरतें।
घर गृहस्थी को संभालने में आप इतनी व्यस्त न हो जायें कि पति को अपने मन की बात करने और अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई और विकल्प ढूंढना पड़े।
यदि पति को ऑफिस से आने में देर हो जाए तो उनसे लडऩे न बैठ जाएं। कुछ देर उन्हें आराम करने देने के पश्चात् शांति से उनके देर से आने का कारण पूछें।
अगर घर के किसी सदस्य की बात से आप को तकलीक पहुंची है तो शांति से पति से इस विषय पर बातचीत करें। झगड़ा किसी परेशानी का हल नहीं होता, इसलिए इससे बचे रहने का प्रयास करें।
हर समय अपने मायके की बढ़ाई न करें और ससुराल की निंदा न करें। ऐसे ताने न दें जिससे पति का आत्म सम्मान प्रभावित हो।
जैसे सरप्राइज की इच्छा आप अपने पति से रखती हैं वैसे सरप्राइज की इच्छा वह भी आपसे रखते हैं, इसलिए कभी उनके जन्मदिन पर उपहार देकर, कभी उनके मनपसंद व्यंजन बना कर उन्हें सरप्राइज देती रहें।
पति के लाए उपहारों की कद्र करें बेशक वह आपकी पसंद का न भी हो। अगर आप उनकी कद्र नहीं करेंगी तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी और आप पति के इन प्यार भरे उपहारों से वंचित भी रह जाएंगी। समय-समय पर उन्हें अपनी पसंद व नापसंद से अवगत करवाती रहें ताकि अगली बार आप अपना मनपसंद उपहार पा सकें।
अगर आप नौकरीपेशा हैं और अपने पति से अधिक कमाती हैं तो उन पर इस बात का रोब न झाड़ें। इससे उनमें हीन भावना पनप सकती है जो आपके मजबूत रिश्ते को कमजोर बना सकती है।
महीने में एक-दो बार बिना घर में किसी को बताए पति के साथ पिक्चर या बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाएं। इससे आप दोनों के बीच रोमांस बना रहेगा और आप कुछ क्षण एक दूसरे के साथ बिता सकेंगे।
- सोनी मल्होत्रा

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