इश्क के भी होते हैं अपने कुछ उसूल

 
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अब आप कहेंगे, इश्क न देखे जात पात, फिर उसूलों की क्या औकात? पर नहीं हुजूर, इश्क के भी अपने कुछ उसूल होते हैं। जिस तरह हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे से इश्क नहीं लड़ाया जाता, ठीक उसी प्रकार इश्क का भूत जब सर चढ़कर बोलता है तो खुद पर संयम रखने के लिए जरूरत पड़ती है उसूलों की।
प्यार की डोर से कोई बंधता है तो रिश्ता बन जाता है। जहां कहीं प्यार की गर्मी होती है तो अनायास ही आंखों में नमी भी उतर आती है। रिश्तों का बंधन होता ही ऐसा है लेकिन आज के रिश्ते बिना रोशनी की लालटेन जैसे हो रहे हैं। प्यार की डोर शायद नहीं, यकीनन इतनी कच्ची है कि दिल जुडऩे से पहले ही अधिकांश मामलों में टूट जाते हैं। एक फंदा प्यार का सीधा बुना जाता है तो दो उल्टे हो जाते हैं। रिश्तों में गर्माहट आये भी तो कैसे?
इश्क अगर सरहदें पार कर जाए तो नाकाम हो जाता है। सूखे हुए दरख़्त पर फल नहीं लगा करते। वैसे भी आज की मॉड जनरेशन इतनी स्वच्छंद और उन्मुक्त है कि उनका मूड बदलते देर नहीं लगती। आज जिसे वह अपने पिछले जन्म की प्रेमिका बता रहा हो, हो सकता है कल उसे पहचानने से भी इन्कार कर दे, इसलिए मोहतरमा यदि आप इश्क फरमाने की इच्छुक हैं तो आज ही इश्क के उसूल बना लीजिए वरना बाद में जब गाड़ी प्लेटफार्म छोड़ जाएगी तो आपका फर्स्ट क्लास रिजर्वेशन कैंसल हो जाएगा।
इश्क करके, पछताने यानी कि इश्क में धोखा खाने से अच्छा है कि सामने वाले को धोखा देने का चांस ही नहीं दिया जाए। माना कि हर प्रेमी धोखेबाज नहीं होता और हर प्रेमिका बेचारी नहीं होती, फिर भी आप घरों में आग से बचने का उपकरण रखती हैं या नहीं? जिस प्रकार रोज-रोज आग लगने का खतरा नहीं होता और फिर भी आप आग से बचने के उपकरण घर में रखती हैं, ठीक उसी प्रकार प्रेमी भले ही कितना सीधा और नेक ईमानदार हो, आप अपनी सेफ्टी के लिए उसूलों के उपकरण अपने पास अवश्य रखिए और ऐसा करने के लिए जरूरी है कि कुछ उसूल बना लिए जाएं।
यह प्रण कीजिए कि कभी भी प्रेमी के साथ बाहर डेट पर अकेली नहीं जाएंगी, जाएंगी भी तो सार्वजनिक स्थल पर। किसी भी एकांत स्थल पर प्रेमी के साथ जाने से परहेज बरतिए।
इश्क करने से पहले सोच लीजिए कि आप उसे स्त्री का जामा पहनाना चाहती हैं या नहीं। बात टाइम पास की हो तो और बात है लेकिन यदि आप सीरियसली उससे मोहब्बत करती हैं तो फिर यह सोच लीजिए कि उसे पाने के लिए आप जमाने का सामना कर सकती हैं या नहीं?
जब आप महसूस करती हैं कि 'आई एम इन लव' तो सच मानिए सारा जहान हसीन लगने लगता है, आपके होठों पर दिनरात मुस्कान सजी रहती है, मौसम में रूमानियत बिखरी दिखती है और आपका मन करता है कि अपनी किसी अजीज सहेली या किसी अपने को दिल की सारी बात बता दें। ठहरिए...!
इश्क का अगला उसूल यह भी है कि इश्क चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, परिणति तक पहुंचने के पूर्व किसी को इसकी भनक न लगने दें वरना आपके इश्क का दुश्मन कोई विलेन ऐन टाइम पर एंट्री मार जाएगा और आपका सींकिया प्रेमी उसके दाव पेंच का सामना नहीं कर पाएगा।
सामाजिक बदनामी से बचने का भी यही सबसे अच्छा रास्ता है कि अपने इश्क की खबर किसी को कानों कान तो क्या, नाकों नाक भी लगने न दीजिए।
कभी भी प्रेमी की नाजायज मांग को पूरा न करें। औरत तो धरती होती है। गलती से भी नाजायज ताल्लुकात का बीज इस धरती पर पड़ जाए तो इस नाजायज गलती की सजा केवल आपको भुगतनी होगी, इसलिए प्यार अपनी जगह, शरीर अपनी जगह। प्रेमी से दूरी बनाए रखने में ही आपकी भलाई है।
जमाना बड़ा खराब है। भूल कर भी प्रेमी को ऐसा कोई खत, दस्तावेज, ऑडियो या वीडियो कैसेट या फोटोग्राफ न दें जिससे आप दोनों के अंतरंग रिश्ते का पता चलता हो अन्यथा बाद में वही प्रेमी ब्लैकमेलर बनकर इन चीजों के माध्यम से आपको ब्लैकमेल कर सकता है।
हमारा समाज पुरूष प्रधान समाज है। पुरूष के सारे ऐब और हरकतें माफ होती है मगर नारी के एक भी गलत कदम के परिश्रम भी गलत ही होता है।
पकड़े जाने पर भुगतना तो नारी को ही पड़ता है और यह एक ऐसा कलंक, ऐसी बदनामी होती है कि फिर ताजिंदगी पीछा नहीं छोड़ती। किसी भूत या चुडै़ल की तरह माथे का टीका बनकर चिपकी ही रहती है।
ऐसी स्थिति में ब्याह से पूर्व संबंध कितने भी गहरे प्रेम संबंध क्यों न हों, श्त्रदी के बाद उन्हें तिलांजलि दे देने में ही सबकी भलाई होती है। ब्याह के बाद पूर्व प्रेमी से किनारा कर लेना ही अच्छा रहता है। यह काम इतना आसान भी नहीं होता मगर दृढ़ता से और संयम से काम लेते हुए प्रिय-वियोग की पीड़ा को झेलते हुए आत्मविश्वासी होने का परिचय देना चाहिए।
ऐसी विषम स्थिति में दिल की आवाज को दबाकर विवेक से काम लेते हुए सख्ती से प्रेमी प्रेमिका को आपस में न मिलने का निर्णय लेना चाहिए। वक्त की नजाकत को समझते हुए खुद पर नियंत्र्त्रण करना और पुराने संबंधों पर विराम लगाना ही सही समय पर लिया गया सही फैसला होता
है।
विवाह के पश्चात भी जो लड़कियां पूर्व प्रेम संबंध कायम रखती हैं, जब कभी भी भेद खुलता है तो पति द्वारा तो प्रताड़ित होती ही हैं, सगे मां बाप या भाई बहन भी साथ नहीं देते। सुरक्षित भविष्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है कि विवाह के बाद विवाह पूर्व के संबंधों पर अंकुश लगा दिया जाये।
- सेतु जैन

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