मां का पप्पू या पत्नी का प्यारा !

 
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शादी होते ही प्राय: प्रत्येक मां के मुंह से यह जुमला सुनने को मिलता है कि बहू ने मेरे बेटे को छीन लिया। बहू के हर काम में नुक्स निकालना, टोका टाकी करना, अपने अधिक अनुभवी होने का दावा करना, बहू को हर बात पर छोटा और नासमझ सिद्ध करना ही अधिकांश सासों का एकमात्र उद्देश्य होता है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रत्येक सास अपने बेटे का सहारा लेती है।
विवाह से पूर्व मां बेटे के कार्यों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया अख्तियार करे तो कोई बात नहीं लेकिन विवाह के बाद चूंकि उसका बेटे के कार्यों के प्रति कोई उत्तरदायित्व नहीं होता, इसलिए वह बेटे पर अपना लाड़ दिखाती है। कई बार तो सास का यह लाड़ पति-पत्नी के बीच तकरार का विषय बन जाता है।
कोई भी सास यह नहीं देखती कि वह अपने पति का कितना ख्याल रखती है जबकि बहू को परिवार के हर सदस्य की जरूरतों का अकेले ध्यान रखना होता है। ऐसे में बहू पर बेटी का ध्यान न रखने का आरोप लगाना कहां तक उचित है? सास बेटे पर सिर्फ ऊपरी लाड़ दिखाती है और बहू जो अपने पति यानी सास के बेटे से सचमुच प्यार करती है, उसके हर सुख दुख में उसके साथ होती है, उसकी हर जरूरत का ध्यान रखती है। ऐसे में बेटा मां का लाड़ला है या पत्नी का प्यारा, इस बात का निर्णय करना बड़ा ही आसान है।  प्रत्येक सास को चाहिए कि विवाह के बाद वह बहू बेटे के आपसी संबंधों में हस्तक्षेप न करे। पति-पत्नी दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं। बेटे पर अब आपकी बहू का हक ज्यादा है। वह उसकी पत्नी, उसके सुख-दुख की सहभागिनी है, इसलिए वह आप के बेटे को आपसे कहीं ज्यादा चाहती है। एक दूसरे का ख्याल रखना उनकी अपनी जिम्मेदारी है। उसमें आप हस्तक्षेप न करें। अगर पत्नी की बीमारी में पति-पत्नी की सेवा करता है तो आपको कोई एतराज नहीं होना चाहिए। दरअसल बेटे की मां कोई भी ऐसा मौका नहीं चूकना चाहती जहां वह बेटे के प्रति अपने लाड़ को न दर्शा सके और बहू को गैर जिम्मेदार व पति के प्रति लापरवाह न ठहरा सके। ऐसा कर के मां बेटे के दिल में जगह बनाने की जगह पति-पत्नी के मधुर रिश्ते में महज कड़वाहट ही घोलती है। सास को अपनी मां के समान मानने की सीख लेकर ससुराल में कदम रखने वाली बहू सास के इस व्यर्थ के लाड़ को देखकर सास के प्रति कड़वाहट से कर जाती है। इसलिए किसी भी मां को चाहिए कि बेटे के विवाह के बाद वह बहू को अपने पति के प्रति जिम्मेदारियों को स्वतंत्रता से निभाने दे व उसे पति के प्रति अपना प्यार दर्शाने का पूरा मौका दे। दरअसल विवाह के बाद इस लाड़ और प्यार की तकरार के पीछे सिर्फ एक ही कारण दिखता है कि विवाह के बाद मां यह बात बर्दाश्त नहीं कर पाती कि बेटा जो इतने वर्षों तक उसका था, उससे पूछकर सारे काम करता था, अपनी सारी कमाई का हिसाब उसे देता था, अचानक किसी ओर का कैसे हो गया जबकि हर मां को वह दिन याद करना चाहिए कि एक दिन वह भी किसी पत्नी या बहू बनकर आयी थी। तब उसका अपने पति के प्रति कितना प्यार था तथा उसकी मां का बेटे के प्रति कितना लाड़ था।
- रश्मि श्रीवास्तव

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