मुज़फ्फरनगर-शामली की एक सीट समेत 8 सीटों के कारण उलझी है घोषणा, जयंत की बीजेपी से भी बातचीत की है चर्चाएं !

 
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मंगलवार को रालोद के अध्यक्ष जयंत सिंह की सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लम्बी चली बैठक के बाद भी सपा-रालोद गठबंधन की विधिवत घोषणा नहीं की गयी, माना जाता है कि मुज़फ्फरनगर और शामली की एक एक सीट समेत 8 सीट ऐसी है जिनको लेकर गतिरोध बना हुआ है। बिजनौर की चांदपुर, सहारनपुर की गंगोह, बागपत की बड़ौत, मथुरा की मांट व छाता, शामली की थानाभवन, बुलंदशहर की शिकारपुर के अलावा मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट पर रस्साकशी चल रही है। इन सीटों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण दोनों दलों के बीच बात लंबी खिंच रही है। अखिलेश थानाभवन से अपने करीबी सुधीर पंवार और चरथावल से हरेंद्र मलिक को लड़ाना चाहते है जबकि जयंत इन दोनों सीट पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहते है। 

माना जाता है कि सोमवार को पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर दोनों दलों के बीच आधिकारिक गठबंधन की घोषणा इसी कारण खटाई में पड़ गई । बुढ़ाना के कश्यप महासम्मेलन में सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद गठबंधन के संकेत दे चुके हैं। रालोद और सपा के बीच सीटों की संख्या पर लगभग सहमति बन चुकी है, लेकिन इनमें पश्चिमी यूपी की करीब 8 सीटें ऐसी हैं, जिन पर दोनों दल अपना-अपना दावा कर रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि इसी सप्ताह आखिरी फैसला हो जाएगा। 

हालाँकि इस सब के बीच बीजेपी से भी जयंत के गठबंधन की चर्चाएं फ़ैल रही है, जयंत उनको नकार भी रहे है लेकिन भाजपा सूत्रों के अनुसार जयंत चौधरी ने भाजपा के सामने एक राज्यसभा सदस्य के साथ ही पश्चिमी यूपी में 40  से अधिक सीटों की मांग रखी है । इसके अलावा भी उनकी कुछ मांगें थीं, जो अभी भाजपा का शीर्षस्थ मानने को तैयार नहीं है । अभी भी उनके साथ वार्ता चल रही है। समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक नाम न छापने की शर्त पर एक विश्वसनीय ने बताया कि भाजपा पर दबाव बनाने के लिए ही मंगलवार को रालोद प्रमुख जयंत चौधरी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिले और उनसे विस्तार से चर्चा की। उनका कहना था कि अभी भी भाजपा के साथ मिलने की संभावना बनी हुई है। उनका कहना है कि तीन नए कृषि बिल वापस लेने के बाद से पश्चिमी यूपी का माहौल बदल गया है। बीजेपी नेता का दावा है कि रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की अभी भी भीतरखाने भाजपा से वार्ता चल रही है। जिधर से ज्यादा मिलेगा, उधर ही झुक जाएंगें।

पश्चिम यूपी को नई सौगात
तीन नए कृषि कानूनों की वापसी के बाद माना जा रहा है कि भाजपा को पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनावी समर में उतरने में मदद मिलेगी। इन कानूनों की वापसी के बाद जाट बिरादरी के प्रभाव वाली 60 से ज्यादा सीटों पर भाजपा की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यही नहीं पश्चिम यूपी को अब केंद्र सरकार की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच की सौगात मिल सकती है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान यह संकेत दिए। उन्होंने कहा कि विधि मंत्रालय के पास न्यायमूर्ति जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट मौजूद है और केंद्र सरकार इस पर विचार कर रही है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय की आगरा खंडपीठ की स्थापना को जल्द मंजूरी मिल जाएगी। बीजेपी को उम्मीद है कि इससे पश्चिम में नाराजगी खत्म हो जायेगी लेकिन बैंच को लेकर अभी से प्रयागराज में जिस तरह से विरोध शुरू हो गया है, बीजेपी उस नुकसान का आंकलन कर रही है, उसके बाद ही अंतिम फैसला करेगी। 

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