मुलायम को नहीं मिल सका एकता का गिफ्ट नहीं

 
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समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर सपा की ओर से उन्हें एकता का गिफ्ट दिए जाने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो सका है। नेताजी के जन्मदिन के मौके पर बेटे अखिलेश यादव और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव के साथ आने की बातें हो रही थीं, लेकिन ये अटकलें अब तक गलत साबित होती ही दिखी हैं। एक तरफ  अखिलेश यादव लखनऊ स्थित पार्टी के मुख्यालय पहुंचे और मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद लिया तो वहीं शिवपाल यादव राजधानी से दूर गांव में दिखे। यह उम्मीद थी कि चाचा और भतीजा के बीच कोई समझौता हो सकता है, लेकिन अब तक कोई ऐलान नहीं हुआ है। दरअसल शिवपाल 100 सीट मांग रहे है, जबकि अखिलेश उन्हें जीत की सम्भावना वाली केवल 10 सीट ही देना चाहते है जिसके चलते मुलायम को गिफ्ट नहीं मिल पाया है। जन्मदिन के मौके पर शिवपाल यादव ने भी बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के प्रति अपना प्यार दिखाया। वे शाम को मुलायम के घर पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।  उन्होंने भाई के साथ मुलाकात की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए एक शायरी भी लिखी। इसमें वे बड़े भाई के प्रति अपने समर्पण को प्रदर्शित करते दिखे। उन्होंने लिखा कि मैंने वहां भी तुझे मांगा था, जहां लोग सिर्फ खुशियां मांगा करते हैं। आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आप दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें व देश और समाज को दिशा दें , ऐसी मंगलकामना। इस संदेश के जरिए शिवपाल एक बड़ा संदेश अखिलेश को देने की कोशिश करते भी दिखे।
 
पंजाब में एक और पार्टी
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक और पार्टी चुनाव मैदान में आ गई है। क्रांतिकारी मजदूर किसान पार्टी के नाम से इसे चंडीगढ़ में लांच किया गया । किसान नेता गुरनाम चढूनी के बाद पंजाब में यह दूसरी पार्टी है, जो सीधे किसानों के नाम से चुनाव लड़ेगी। पार्टी के चेयरमैन लश्कर सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वह चुनाव के लिए किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। उनकी पार्टी किसानों और मजदूरों के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में आएगी।

आंध्र प्रदेश में एक ही राजधानी
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने उस कानून को वापस लेने का ऐलान किया है जिसके मुताबिक, राज्य में तीन राजधानियां बनाई जानी थी। राज्य के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कैबिनेट के साथ आपात बैठक बुलाकर यह फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक के बाद बीते साल जून में बना कानून वापस लिए जाने का निर्णय किया गया है।

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