क्यों बढ़ रही हैं पति-पत्नी के बीच दूरियां?

 
1

आज के समय में छोटी-छोटी बातों के चलते जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लेने वाले पति-पत्नियों में आपसी दूरियां बढ़ती जा रही हैं। इसका मुख्य कारण महिलाओं का कामकाजी और महत्वाकांक्षी होना ही हो सकता है।
आज के समय में अधिक से अधिक स्त्रियां कामकाजी हो रही हैं और घर की चारदीवारी के बाहरी संसार की चकाचौंध से प्रभावित हो रही हैं। आज वे अपने पैरों पर खड़ी प्राय: बराबरी और कभी-कभी तो परिवार में अपने पतियों से भी अधिक आर्थिक भागीदारी निभाती हैं। पत्नियां घरेलू कामकाज में भी पतियों से अधिक सहयोग की उम्मीद करती हैं तथा उनका प्रभुत्व स्वीकारना नहीं चाहती।
जब दबंग व्यक्तित्व का अपने बराबर के व्यक्ति से मुकाबला होता है, तो दोनों के अहंकार टकरायेंगे ही। आक्रामक व्यक्तित्व का सामना आक्रामक से ही होने पर दोनों आपस में तालमेल नहीं कर पाते। व्यवहार चतुर और भावुक व्यक्तियों में भी टकराव होता है।
कुछ समय पहले के उपन्यास, कहानियां, फीचर फिल्मों तथा धारावाहिकों में त्याग, बलिदान एवं कुर्बानियों का वर्णन होता था जिससे पति-पत्नी को शिक्षा मिलती थी किंतु आज के समय में इन सभी में टकराव का ही वर्णन होता है। पहले पति-पत्नी आपसी कष्ट को झेलने में खुशी महसूस करते थे किंतु आज न तो कष्ट ही झेलना चाहते हैं और न ही उनमें त्याग की ही भावना है।
आज मानव में जीवन के प्रति बहुत बदलाव आ रहा है। पहले मनुष्य मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अधिक परिपक्व और भावनाओं और इच्छाओं को दबाने में सक्षम होता था क्योंकि जीवन का उद्देश्य तब मूल्यों पर आधारित था। वह अधिक विवेकशील था, मान-मर्यादाओं को मानता था और समाज को अधिक महत्व देता था। सभी कुछ सामाजिक दृष्टिकोण से आंका जाता था। जीने की स्वतंत्रता और दूसरे के कामों में विघ्न न डालना जीवन का एक आदर्श था।
आज के समय में अपने कैरियर को बनाने में जुटी औरत बहुत महत्वाकांक्षी हो गई है। वह अक्सर देर से शादी करती है, परिणामस्वरूप वैवाहिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करने में असमर्थ रहती है। पति-पत्नी के बीच आपसी तालमेल दिन पर दिन कम होता जा रहा है जिसका कुप्रभाव संतान पर पड़ता है। अपने अहम् के कारणों से न तो पति ही झुकना चाहता है और न ही पत्नी।
अनेक पति-पत्नी के बीच इसलिए भी दूरियां बढऩे लगी हैं क्योंकि इच्छानुसार सेक्स की पूर्ति नहीं हो पाती या फिर पत्नी संतान उत्पन्न करना नहीं चाहती है। यह विचारणीय प्रश्न है कि अग्नि के पवित्र सात फेरों को लेकर सुख-दुख में साथ निभाने का वचन लेकर जब आत्मीय रिश्ता जुड़ता है तो क्या वह रिश्ता इतना कमजोर रहता है कि थोड़ी-सी अनबन होते ही दूरियां बढऩे लगें?
वैवाहिक जीवन में सेक्स भी आवश्यक है किंतु इतना नहीं कि इसके कारण पवित्र रिश्ता तोड़कर अनैतिक संबंध स्थापित कर लें? आपसी समझौता, एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति, आपसी तालमेल, धैर्य, प्यार और सहयोग से बढ़ती दूरियों को कम किया जा सकता है।
- पूनम दिनकर

From around the web