महिलाएं बचें आत्मग्लानि से

 
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अपने को आकर्षक मानकर चलने वाली युवतियों में आत्मविश्वास भरपूर रहता है। उन्हें जीवन से प्यार होता है लेकिन ऐसी युवतियां बहुत कम मिलेंगी। ज्यादातर युवतियां अपनी शक्लसूरत, फिगर को लेकर परेशान ही मिलेंगी। यह परेशानी तब और बढ़ जाती है जब कोई दूसरी युवती जो बेहद आकर्षक और खूबसूरत हो, सामने आ जाती है।
दुनिया की सुंदर से सुंदर औरत भी और भी सुंदर होने की ख्वाहिश सदा रखती है। उसे अपने से संतुष्टि नहीं रहती। उम्र ढलती है तो सौंदर्य का रूप भी बदलने लगता है। अब लोग मुड़-मुड़ कर उन्हें नहीं देखते। यह बात किसी भी बढ़ती उम्र की खूबसूरत औरत के लिये बेहद यातनादायक हो जाती है।
यही कारण है कि उम्र बढऩे पर कई औरतें बेहद तनावग्रस्त, चिड़चिड़ी और खीझी हुई सी रहने लगती हैं। जीवन रस उनके लिये सूखने लगता है। वे आत्मलीन रहने लगती हैं। कभी पति से तो कभी बहू से उनकी तकरार होने लगती है। उन्हें कोई भी समझ नहीं पाता। उन्हें जरूरत होती है थोड़ी सी प्रशंसा, थोड़े आश्वासन की इस बात की कि वे अब भी ग्रेसफुल लगती हैं।
बाहरवालों से ज्यादा उम्मीद रखना व्यर्थ है। यह निर्भरता उन्हें भीतर से कमजोर बनाती है। दरअसल आत्मबोध में यह परिवर्तन बाह्य परिवर्तन से ज्यादा आत्मविश्वास की कमी के कारण आता है जिसे उन्हें बरकरार रखना होगा, यह सोचकर कि यह तो प्रकृति का नियम है। बदलाव प्राकृतिक है। इसे हम रोक नहीं सकते। फिर क्यों न इसे पूरी गरिमा के साथ स्वीकारें। खूबसूरती को लेकर जब कम उम्र में ही कांपलेक्स होने लगे तो यह जरूरी हो जाता है कि पहले यह जाना जाए कि खूबसूरती है क्या? अब यह जरूरी तो नहीं है कि जो खूबसूरत नहीं है, वह आकर्षक भी न हो। खूबसूरती के मापदंड बदल भी सकते हैं और बदलते भी रहे हैं लेकिन यह एक शाश्वत सत्य है कि भीतरी सौंदर्य से ही बाह्य सौंदर्य दमकता है।
सभी औरतें अच्छा दिखना चाहती हैं। इसके लिये वे कोशिश भी करती हैं। बाजार सौंदर्य प्रसाधनों से अटा पड़ा है। नित नये ब्रांड की क्रीम लोशन, हेयर कलर और सौंदर्य बढ़ाने के अन्य कई प्रकार के कॉस्मेटिक्स बाजार में बिकने  के लिए आ जाते हैं और धड़ल्ले से बिकते भी हैं लेकिन अगर कोई भी औरत बग़ैर सोचे समझे किसी फैशन या पहनावे को अपनाती है उम्र, रंग, फिगर को नजऱअंदाज करके सजती संवरती है तो वह सौंदर्य बढ़ाने के बजाय अपने को कार्टून ज्यादा बना लेती है।
खुशी से बढ़कर दूसरा सौंदर्य प्रसाधन नहीं है। सौंदर्य का सबसे बड़ा दुश्मन तनाव है। खुशी बाहर से नहीं मिलेगी। वह वह आपके भीतर होती है। उसे महसूस  करने की आदत डाल लें।
कभी भी अपने को लेकर नेगेटिव फीलिंग आये, मन में आत्मग्लानि जैसा बुझा देने वाला, अवसाद से भर देने वाला जज़्बा उठे तो अपने आप को समझाने का प्रयास करें। यह सोचें कि असली सुंदरता तन की नहीं, मन की होती है। यह मन की उदारता, आत्मविश्वास संतुष्टि और मनोबल से चेहरे पर गिरती है।
- उषा जैन 'शीरीं'

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