Wednesday, February 28, 2024

मेरठ एसटीएफ ने सॉल्वर गैंग के 12 सदस्य किए गिरफ्तार

मेरठ। मेरठ एसटीएफ की टीम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ऑनलाइन कंप्यूटर ऑपरेटर परीक्षा में सेंधमारी करने वाले सॉल्वर गैंग के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के खिलाफ बड़ौत थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। दूरदराज बैठे इस गिरोह के सदस्यों ने रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए प्रश्न पत्र हल किये।

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एसटीएफ मेरठ यूनिट के एएसपी बृजेश कुमार सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस की ऑनलाइन कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती परीक्षा चल रही है। जिसमें सिस्टम हैक करने और सॉल्वर बैठाकर परीक्षा कराने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिली थी। एसटीएफ को पता चला कि बागपत जनपद में बड़ौत स्थित आवास विकास कॉलोनी में अनिल कुमार के मकान में कुछ व्यक्ति किराए पर कमरा लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में सिस्टम हैक करके अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर प्रश्न पत्र हल कर रहे हैं। ये लोग अभ्यर्थियों से चार-पांच लाख रुपए लेते थे। एसटीएफ की टीम ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि ये लोग सात फरवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस में कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में अभ्यर्थी के कंप्यूटर की स्कीन शेयर कर यहीं से पेपर सॉल्व कर रहे थे।

गाजियाबाद के दुहाई में बना रखी थी पूरी लैब

इस गैंग ने गाजियाबाद जनपद के दुहाई में विधान पब्लिक स्कूल में लैब को फर्जी तरीके से परीक्षा कराने के लिए केंद्र आवंटित करा रखा है। जहां से अपने अन्य साथियों की मदद से ऑनलाइन परीक्षा हैकिंग का काम करते थे। एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र पहुंच कर सात अभ्यर्थियों व लैब के सहयोगी रजनीश कुमार तथा अश्विनी कुमार को हिरासत में लिया। इस गैंग ने 250 कंप्यूटर की लैब तैयार की। कंप्यूटर हैकिंग एक्सपर्ट पलवल हरियाणा निवासी राम चौहान ने रोहित चौधरी के कहने पर लैब में आकर 28 जनवरी को एक सिस्टम पर कुछ सॉफ्टवेयर (एनीडेस्क, नोड जेएस, पाइथॉन लांचर) इंस्टाल कर इस सिस्टम को मास्टर सिस्टम बनाया।

एक अभ्यर्थी की स्क्रीन शेयर के लेता था 50 हजार

आरोपितों ने एसटीएफ को बताया कि परीक्षा प्रारंभ होने से पहले ही लैब में मौजूद अपने सहयोगियों के माध्यम से कहीं भी बैठकर राम चौहान लैब में मौजूद मास्टर सिस्टम को सॉफ्टवेयर के माध्यम से अपने सिस्टम पर लेकर जिन-जिन अभ्यर्थियों से पैसे लेकर पेपर हल कराने की बात तय होती थी, उनके परीक्षा केंद्र पर आवंटित सिस्टमों के एक्सेस ले लेता था। उसको अपने अन्य साथी जो पेपर हल करने में एक्सपर्ट थे, उनके सिस्टम पर भेज देता था। जिससे केंद्र पर मौजूद अभ्यर्थी के सिस्टम का पूरा एक्सेस इनके पास पहुंच जाता था। ये प्रश्न-पत्र अपने सिस्टम से हल करते थे। अभ्यर्थी केवल बैठकर माउस हिलाता रहता था। यह लोग प्रत्येक अभ्यर्थी से चार से पांच लाख रुपये इस कार्य के लिए लेते थे। राम चौहान एक अभ्यर्थी की स्क्रीन शेयर करने के लिए 50 हजार रुपये लेता था।

एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपित

गिरोह का सगरना रचित चौधरी निवासी भाज्जू थाना बाबरी शामली है। उसके गिरोह में कर्मवीर निवासी ग्राम बिहारीपुर थाना व जनपद बागपत सॉल्वर है। दानवीर निवासी वृद्धा ज्योति कॉलोनी थाना बड़ौत, रजनीश कुमार निवासी बगडस थाना भगवानपुर जनपद बेगुसराय बिहार, अश्विनी निवासी कूकड़ा थाना नई मंडी जनपद मुजफ्फरनगर सहयोगी है। अनिल कुमार निवासी ग्राम जरूवा कटरा थाना मलपुरा जनपद आगरा, अक्षय तंवर निवासी सुन्हेड़ा थाना खेकड़ा जनपद बागपत, मनीष सरोहा निवासी शेरपुर लुहारा थाना छपरौली जनपद बागपत, आलोक चौहान निवासी बावली रोड, थाना बड़ौत, बागपत, धर्मेंद्र निवासी तुमोला थाना कोसी कलां जनपद मथुरा, लोकेश कुमार पुत्र अरविंद सिंह निवासी पुरा थाना मंगोरा जनपद मथुरा और आर्यदीप तोमर निवासी बामनौली थाना दोघट जनपद बागपत अभ्यर्थी है। आरोपितों के पास से तीन लैपटॉप, तीन डेस्क टॉप कंप्यूटर, आठ मोबाइल फोन, छह स्क्रीन शॉट, आठ एडमिट कार्ड बरामद किये।

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