मुजफ्फरनगर में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल! सवा नौ बजे तक नहीं खुला स्कूल का ताला, गेट के बाहर बैठकर गुरुजी का इंतजार करते रहे मासूम
सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य समेत 4 शिक्षक नदारद; चाबी लेकर घर बैठे रहे हेडमास्टर, ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर किया वायरल
मुजफ्फरनगर। जनपद के बघरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरोत्तमपुर माजरा में सरकारी शिक्षा तंत्र की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकार द्वारा शिक्षा सुधार के तमाम दावों को उस समय करारा तमाचा लगा, जब स्कूल खुलने के निर्धारित समय के घंटों बाद तक भी मुख्य गेट का ताला नहीं खुल सका। सर्दी के इस मौसम में मासूम बच्चे स्कूल के बाहर जमीन पर बैठकर अपने गुरुजी और प्रधानाचार्य का इंतजार करते रहे, लेकिन न तो चाबी पहुँची और न ही जिम्मेदार अधिकारी। लापरवाही का आलम यह रहा कि स्कूल में तैनात कुल सात शिक्षकों में से आधे से ज्यादा बिना किसी सूचना के गायब मिले।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरोत्तमपुर माजरा के इस सरकारी स्कूल में सवा नौ बजे तक भी सन्नाटा पसरा हुआ था। करीब 100 से अधिक छात्र-छात्राएं जब सुबह समय पर स्कूल पहुँचे, तो उन्हें मुख्य गेट पर भारी-भरकम ताला लटका मिला। पहले तो बच्चे वहीं खड़े रहे, लेकिन जब काफी देर तक कोई नहीं आया तो वे निराश होकर गेट के बाहर ही बैठ गए। ग्रामीणों ने जब इस स्थिति को देखा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। पता चला कि स्कूल की चाबी प्रधानाचार्य के पास ही रहती है और वे स्वयं स्कूल नहीं पहुँचे थे, जिसके चलते पूरा स्कूल परिसर ताले में बंद रहा।
7 में से 4 शिक्षक रहे गायब, बीएसए ने नहीं उठाया फोन
स्कूल की हाजिरी और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर जब ग्रामीणों ने पड़ताल की, तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। स्कूल में कुल सात शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन मौके पर केवल तीन शिक्षक ही मौजूद मिले। प्रधानाचार्य समेत चार शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। इस अव्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) संदीप कुमार से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनका मोबाइल फोन भी नहीं उठा, जिससे विभागीय जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
भविष्य के साथ खिलवाड़ से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्कूल में शिक्षकों की मनमानी कोई नई बात नहीं है। अक्सर अध्यापक अपनी मर्जी से आते-जाते हैं, लेकिन आज की घटना ने हदें पार कर दीं। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि एक ओर सरकार 'स्कूल चलो अभियान' पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर बघरा ब्लॉक के शिक्षक बच्चों के भविष्य को ताले में बंद कर घर बैठे हैं। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि लापरवाह प्रधानाचार्य और गायब शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि दोबारा मासूम बच्चों को अपनी ही पढ़ाई के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े।
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