देश में “द केरला स्टोरी” जैसी घटनाएं घटित ना हो, इसके लिए बेटियों को दिया जा रहा है प्रशिक्षणः मिनाक्षी स्वरुप
मुजफ्फरनगर। थाना नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रामपुरी स्थित लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में आर्य वीरांगना योगा एवं चरित्र निर्माण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची नगर पालिका चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप ने विद्यालय एवं संस्था के पदाधिकारियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि ऐसे […]
मुजफ्फरनगर। थाना नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रामपुरी स्थित लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में आर्य वीरांगना योगा एवं चरित्र निर्माण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची नगर पालिका चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप ने विद्यालय एवं संस्था के पदाधिकारियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि ऐसे प्रांगण में मुझे पहुंचने का पहली बार मौका मिला। और यहां पर आकर बहुत अच्छा लग रहा है बेटियों को बौद्धिक और शारीरिक विकास नि:शुल्क दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटियां स्वतंत्र होकर रहे इसके लिए उन्हें मजबूत बनाया जा रहा है।
आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संचालक पंकज आर्य ने बताया की यह आर्य वीरांगना दल का प्रशिक्षण शिविर है। इसमें गौरव आर्य और उनकी पत्नी रचना आर्य के नेतृत्व में चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर में तीनों प्रकार की उन्नति जो सर्वांगीण विकास होता है। शारारिक आत्मिक और सामाजिक उन्नति हेतू इनको प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन नन्ही मुन्नी बच्चों को भौतिक रूप से मजबूत किया गया है। पंकज आर्य ने कहा कि द केरला स्टोरी जैसी घटनाए में देश में ना घटित हो सके अपने ऋषि मुनि,महात्मा विद्वान जो एक अरब 96 करोड़ वर्षों पुरानी हमारी संस्कृति है।
संस्कृति में राम और कृष्ण की संस्कृति के पाठ को इन बेटियों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटियों को शारीरिक रूप से आत्मिक रूप से दो-दो 4-4 घंटे दिन में इनको प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ संध्या आदि और अपने महापुरुषों के क्या आचरण थे। उनकी क्या जीवन चर्या थी। दुष्टों के प्रति उनका क्या रवैया था। वह सारे गुण इन बेटियों को सिखाए गए हैं। शारीरिक उन्नति के लिए जूडो कराटे छुरी का अभ्यास आदि सर्वांग सुंदर व्यायाम भूमि नमस्कार सूर्य नमस्कार तलवार आदि के अभ्यास भी इन बालिकाओं को सिखाए जाते हैं। ताकि यह बड़ी होकर मनचलों का मुकाबला कर सके।
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