शिव की भक्ति में लीन हरिद्वार से जल लेकर मुजफ्फरनगर पहुंचा दिव्यांग कावड़िया
मुजफ्फरनगर। कांवड़ मेले के दौरान शिव की भक्ति का अनोखा रूप देखने को मिलता है जहा एक ओर लाखों कावड़ियों का रेला हरिद्वार से जल उठा कर अपने अपने गंतव्य की ओर जाता दिखाई पड़ता है तो वही चारो ओर शिव शंकर की गूंज ही गूंज सुनाई पड़ती है। शिव शंकर के इस पावन मेले […]
मुजफ्फरनगर। कांवड़ मेले के दौरान शिव की भक्ति का अनोखा रूप देखने को मिलता है जहा एक ओर लाखों कावड़ियों का रेला हरिद्वार से जल उठा कर अपने अपने गंतव्य की ओर जाता दिखाई पड़ता है तो वही चारो ओर शिव शंकर की गूंज ही गूंज सुनाई पड़ती है।
शिव शंकर के इस पावन मेले में सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में एक दिव्यांग भोला भी हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली की ओर जाता नजर आया। इस दिव्यांग कावड़िए को देखकर यह साफ नजर आ रहा था कि किस तरह दिव्यांगता पर शिव की भक्ति भारी है।
आपको बता दें कि मथुरा निवासी लाखन सिंह नाम का ये दिव्यांग भोला हरिद्वार से गंगाजल भरकर दिल्ली कावड़ लेकर जा रहा है। दिव्यांग भोले लाखन से जब हमने बात की तो पता चला कि वह पिछले 14 वर्षों से शिव की भक्ति में लीन होकर कावड़ ला रहा है रोजाना 20 से 22 किलोमीटर चलकर ये दिव्यांग भोला अपनी यात्रा पूरी कर रहा है।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: होली के दिन घर में घुसकर महिला से अभद्रता और पति पर जानलेवा हमला, वीडियो वायरल17 लोगों की टीम में शामिल इस दिव्यांग भोले ने बताया कि वह हरिद्वार से जल ला रहे हैं दिल्ली जाएंगे, मैं पिट्ठू बैग कावड़ लाया हूं यह 14वीं कावड़ है मेरी हम रोज 20-22 किलोमीटर चल रहे हैं, मेरी 17 लोगों की टीम है, वैसे तो कुछ नहीं बस थोड़ी पैर आदि में प्रॉब्लम हो रही है, नहीं कुछ नहीं यह तो भोले बाबा की इच्छा थी एवं मां बाप तो है नहीं, मैं मथुरा का रहने वाला हूं, जब मेरे माता-पिता खत्म हुए थे तब कावड़ लाने की इच्छा हुई थी, आज मैं 14वीं बार कावड़ लेकर जा रहा हूं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां