गांधी कालोनी में ऋग्वेद यज्ञ की पूर्णाहुति, गृहस्थ जीवन को संस्कारो से बहुमूल्य बनाने का आह्वान
 

 
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मुजफ्फरनगर। वेदों की ज्योति जलती रहे, ओम का झंडा ऊंचा रहे, के जयघोष के साथ ऋग्वेद यज्ञ की पूर्णाहुति हो गई। वेदाचार्य डॉ. निष्ठा वेदालंकार ने कहा कि गृहस्थ जीवन को संस्कारो से बहुमूल्य बनाएं।

गांधी कालोनी में तीन दिवसीय ऋग्वेद यज्ञ के समापन समारोह में डॉ. निष्ठा वेदालंकार ने कहा कि संस्कार जीवन का निर्माण करते है। वैदिक सनातन संस्कृति में जीवन और मृत्यु की कर्म यात्रा संस्कारों से बंधी है। गृहस्थ आश्रम को संस्कारों और सदाचरण से श्रेष्ठ बनाये, जिससे जीवन की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और संतान सुयोग्य बनेगी। 

उपदेशक कुलदीप विद्यार्थी ने कहा कि धन की तीन गति है, दान, भोग और नाश। धर्म के कार्यो, दान और सेवा में धन खर्च करना ही शुभ है। उन्होंने योगिराज कृष्ण के महान जीवन के प्रसंग सुनाये। स्वामी यशवीराश्रम ने कहा कि शुद्धि आंदोलन के द्वारा स्वामी श्रद्धानंद ने लाखों भारतीयों की घर वापसी कराई था। जनसंख्या पर नियंत्रण को कानून आवश्यक है। धर्म और राष्ट्र की रक्षा को आगे आये। लव जिहाद से बेटियों को बचाये। बच्चों को धर्म की शिक्षा दें।

राकेश आडवाणी बरला ने यज्ञ महिमा बताई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि कथनी और करनी के फर्क को मिटाए। मन, वचन और कर्म से पवित्र बनिये, बुराइयों का त्याग कीजिये, तभी परिवार और समाज सुदृढ़ बनेगा।

आचार्य ने वेदाचार्य डॉ. निष्ठा वेदालंकार को शॉल और सम्मानराशि भेंट कर सम्मानित किया। साढ़े तीन वर्ष की बेटी अनुषा राणा ने वेद मंत्रों का पाठ करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। संयोजक गजेंद्र राणा और नीरज राणा ने संतों, विद्वानों का सत्कार किया। यज्ञमान सत्यजीत एवं शालिनी राणा रही। वेदपाठ हेमलता और शिवानी आर्या ने किया। स्वामी योगानन्द, महात्मा कल्याणानंद, विनीत धीमान ने विचार रखे।

आंदोलनकारी विजय सिंह, पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह, जगदीश अरोरा, आर्य समाज गांधी कालोनी प्रधान राकेश ढिंगरा, जिला सहकारी बैंक संचालक सुभाष चौधरी, जगदीश प्रसाद त्यागी, प्रणपाल सिंह राणा, देवेंद्र राणा, डॉ. नीरज शास्त्री, यज्ञदत्त आर्य, योगेश्वर दयाल, पूर्व प्रधानाचार्य विजय कुश, वैध मोहर सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।

ऋग्वेद यज्ञ में आर्य समाज तथा भारतीय योग संस्थान से जुड़ी मंजू त्यागी, नीशू चौधरी, प्रमिला गिरधर, अंजू छाबड़ा, मीनू गुप्ता, सुशीला देवी, ओमवती, कांता, बबीता आदि सैकड़ों बहनों ने आहुतियां अर्पित की। उधर, इंद्रपाल सिंह, मानपाल सिंह, विजय पाल सिंह, जयपाल धीमान, शिव कुमार धीमान, प्रमोद आदि ने भाग लिया।

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