मुज़फ्फरनगर में प्रशासन ने कराई काली राख के ढेर की खुदाई, कैमिकल के सैंपल भेजे लखनऊ

 
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मोरना। गंगनहर पटरी पर पिछले कई वर्षों से फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख पड़ी हुई है, जिसमें कई लोग झुलस कर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें एक युवक की उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। युवक की मौत पर पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए राख डालने वाले ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया तथा राख की खुदाई कराकर उसमें मिले केमिकल को जांच के लिए लखनऊ भेज दिया है। लखनऊ से आई टीम राख के सैंपल अपने साथ ले गई। घायल व्यक्तियों को राख से घायल होना न बताकर केमिकल से घटना होनी बताई है, जिसमें उन्होंने जांच के उपरांत सिंचाई विभाग सहित व केमिकल डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

भोपा थाना क्षेत्र के ग्राम नगला बुजुर्ग में ठेकेदारों द्वारा गंग नहर पटरी के किनारे सिंचाई विभाग की जमीन पर पिछले 1० वर्षों से काली राख का कारोबार चल रहा है, जिसमें सिंचाई विभाग के साथ मिलकर गंग नहर पटरी पर राख डालने वाले चांदी काट रहे है, लेकिन सिंचाई विभाग ने कोई कार्रवाई अब तक नहीं की है, जिसमें 9 जुलाई दिन शनिवार को भोपा थाना क्षेत्र के नगला बुजुर्ग निवासी मोहम्मद नबी झुलस कर गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई थी। युवक की मौत पर पुलिस व प्रशासन में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने राख डालने वाले ठेकेदार को गिरफ्तार कर हत्या के मामले में जेल भेज दिया, जिसके बाद अधिकारियों की रिपोर्ट पर रविवार को लखनऊ से आई टीम के डॉक्टर डीके पटेल सहित जिले की टीम घटनास्थल पर पहुंची तथा जेसीबी लगाकर वहां की खुदाई करनी शुरू कर दी, जिसमें खुदाई करते हुए कुछ हड्डियां भी वहां दिखाई दी। वहीं प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख में इतना खतरनाक केमिकल नहीं होता कि वह किसी को झुलसा सके। किसी व्यक्ति द्वारा केमिकल दबाया गया है जिसके सैंपल लेकर लखनऊ के लिए भेज दिए हैं। जांच के उपरांत ही पता चल पाएगा कि किस प्रकार का केमिकल यहां पर दबाया गया है, जिसके बाद अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण विभाग की टीम से एई विपुल कुमार वर्मा, इमरान, अनंत दुबे, लेखपाल अंकित कुमार, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
कई घंटे चली काली राख के ढेर की खुदाई: गंग नहर पटरी पर जिलाधिकारी के आदेशों पर पहुंची प्रदूषण विभाग व लखनऊ से आईआईटी की टीम ने जेसीबी लगाकर काली राख की खुदाई करनी शुरू कर दी, जिस में खुदाई के दौरान राख का सैंपल लेकर लखनऊ के लिए भेज दिया है, वहीं अधिकारियों ने काली राख में केमिकल की पुष्टि की बात कही है।
हड्डियों मिलने से क्षेत्र में फैली सनसनी: गंगनहर पटरी के किनारे पड़ी राख की खुदाई के दौरान हड्डियों के निकलने से क्षेत्र में दहशत फैल गई। अधिकारियों ने कंकाल को किसी जानवर की हड्डियों बताया। ग्रामीणों के अनुसार बताया गया है कि इस केमिकल युक्त राख में प्रत्येक दिन जंगली जानवर सहित अन्य जीव जंतु जलकर भस्म हो गए, जिस से बड़ी हानि हुई है।  

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