एसडी पब्लिक स्कूल में 54वां स्थापना दिवस 'सृजन-2022' इन्द्रधनुषीय रंगारंग कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न
 

 
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मुजफ्फरनगर। एसडी पब्लिक स्कूल सीनियर विंग प्रांगण में 54वां स्थापना दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्रों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर सभी दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान, उनकी पत्नी डा. सुनीता बालियान, प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल तथा उनकी पत्नी श्रीमती अंजू बाला अग्रवाल तथा गैस्ट ऑफ ऑनर एसडी एसोसिएशन के सचिव डा. चंद्र कुमार जैन इस कला व संस्कृति के समन्वय पर आधारित कार्यक्रम 'सृजन' के साक्षी बने।

अतिथि सोमांश प्रकाश का स्वागत विद्यालय सचिव आकाश कुमार, सपना कुमार, डॉयरेक्टर श्रीमती चंचल सक्सैना, विद्यालय प्रधानाचार्या श्रीमती अनीता दत्ता, उपप्रधानाचार्य शिव कुमार शर्मा, जूनियर विंग इंचार्ज श्रीमती रेनू गोयल, इंचार्ज श्रीमती कुमुद गार्गी, श्रीमती गीता मित्तल व चीफ प्रोक्टर विकेश गुप्ता ने किया। तत्पश्चात् मुख्य अतिथि डा. संजीव बालियान के कर कमलों द्वारा वाग्देवी सरस्वती माँ व विद्यालय संस्थापकों के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

विद्यालय डायरेक्टर श्रीमती चंचल सक्सैना ने सभी अतिथियों व आगंतुकों का स्वागत किया। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, यहां सभी धर्मों का समान रूप से आदर किया जाता है। इसी भावना को दर्शाते हुए सुर, लय और ताल के साथ सर्वधर्म प्रार्थना ने वातावरण को धार्मिक रंग में रंग दिया। विद्यालय प्रधानाचार्या श्रीमती अनीता दत्ता द्वारा विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें विद्यालय की गतिविधियों व विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।

विद्यालय के नन्हें-मुन्ने बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य 'अमीबा' में सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक रूप दिखाया गया। साथ ही विद्यार्थियों द्वारा सुंदर नृत्य नाटिका के माध्यम से मनुष्य की उस समय की आदिम अवस्था का सुंदर व मनोहारी मंचन किया गया, जब मनुष्य जंगलों में प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके रहता था। कृषि प्रधान देश की संस्कृति को दर्शाते हुए विभिन्न प्रदेशों की झलकियाँ समेटे सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया तथा एक जीवंत मंचीय प्रस्तुति के द्वारा यह संदेश दिया गया कि गुरूकुल शिक्षा पद्धति हमारी प्राचीन पद्धति है और भारतीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है, प्राचीन समय में गुरूकुलों में संगीत, नृत्य व युद्धकला की भी शिक्षा दी जाती थी। इस जीवंत मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से सौरमंडल के बारे में दर्शकों को जानकारी दी जिसने सभी दर्शकों का मन मोह लिया।

'संस्कृति तथा संगीत' किसी भी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र स्वरूप का नाम है। संस्कृति को अपनाते ही जीवन में खुशियों की बहार आ गयी तथा हर तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ छा गयी। एसडी पब्लिक स्कूल के छात्र समय-समय पर अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र में देते आए है, तो संगीत व नृत्य का क्षेत्र कैसे अछूता रह सकता था। छात्रों ने अपनी प्रतिभा नृत्य एवं संगीत साधना के द्वारा पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। आधुनिक युग तकनीकी का युग है यह तकनीक हमारे लिए किस प्रकार सहायक सिद्ध होती है-हमारे अंग्रेजी नाटक के बाल-कलाकारों ने यह समझाने का प्रयास किया।

मनुष्य में आगे बढऩे की चाह तथा भौतिक संसाधनों के अत्यधिक उपभोग की लालसा नैतिक मूल्यों के पतन का कारण बनती है इन्हीं नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन हमें अधोगति की ओर ले जाता है। 'प्रदूषण' नामक राक्षस ने हमारे पर्यावरण को खंड-खंड कर दिया है। भूमि-प्रदूषण में वृक्षों की कटाई एक महत्वपूर्ण कारक है, इसी प्रकार जल-प्रदूषण तथा वायु-प्रदूषण के महत्वपूर्ण कारकों का चित्रण छात्रों ने मनोहारी नृत्य द्वारा समझाया। इंसान लालच के वशीभूत होकर प्राकृतिक संसाधनों को अपने अंदर समेटने में लगा रहता है इसी होड़ में इंसान ही इंसानियत का दुश्मन बन गया है, यही लालच युद्ध का रूप धारण कर लेता है। इसी भावना को विद्यालय के बाल-कलाकारों ने नृत्य-नाटिका द्वारा दर्शाया। इसी श्रृंखला की अगली कड़ी के रूप में मानव का विकास होने के साथ-साथ आधुनिक युग में नैतिक मूल्यों के पतन का संदेश देती हिन्दी नाटिका ने दर्शकों को इस ओर सोचने के लिए विवश कर दिया।

जैसे-जैसे मनुष्य के नैतिक मूल्य गिरते गये, प्रकृति भी मनुष्य को अपना रौद्र रूप दिखाती चली गई, परंतु जब मनुष्य जागा, उसके अंदर एक नई सोच ने जन्म लिया तभी उसके साथ प्रकृति ने भी सामंजस्य स्थापित करना शुरू कर दिया। उसने अपने जीवन को एक नई दिशा दी तथा यहीं से एक नई सोच का प्रादुर्भाव हुआ।

योग और जुम्बा के माध्यम से बताया गया कि मनुष्य का शारीरिक, मानसिक व आत्मिक विकास यौगिक क्रियाओं द्वारा संभव है, आज के दौड़ धूप भरे वातावरण में योग के द्वारा कुछ पल सुकून के व्यतीत किए जा सकते हैं।
धरती को खुशहाल और हरा भरा रखने के लिए खुद जियो और जीने दो का संदेश देते हुये संगीमय प्रस्तुति ने वातावरण को मनोरम बना दिया। यूएन द्वारा 2030 तक के लिए निर्धारित किये गये 17 लक्ष्यों को पूर्ण करने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डा. संजीव बालियान ने शैक्षिक सत्र 2021-22 की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पारितोषिक वितरित कर सम्मानित किया। कक्षा 12वीं के सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं में साइंस ग्रुप से शौर्य पवार, कॉमर्स ग्रुप से अंजली बत्रा व मानविकी संकाय से आकांक्षा पुण्डीर पुरस्कृत किए गए। विषयानुसार सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों में रसायन विज्ञान से कशिश, शौर्य, वंश, गणित विषय से आदित्य, पारस, प्रीति, शौर्य, भौतिक विज्ञान से आदित्य कॉमर्स ग्रुप में बिजनेस स्टडीज से ध्रुव, नंदिनी, एकाउटेंसी से देवांग, आयुष, मनोविज्ञान से अर्पित, फारिहा, ईशा, करिश्मा, फिजिकल एजूकेशन से अविरल, इंजीनियरिंग ग्राफिक्स से-वैभव अग्रवाल, भूगोल से अभिमन्यु एंटरप्रेन्योरशिप से आदित्य राजनीति शास्त्र से आकांक्षा तथा कक्षा 10वीं से सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र वंश गोयल रहे।

बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ गृह परीक्षा में भी उत्तम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। इनमें कक्षा प्रथम से मान्या गर्ग, द्वितीय से राजी-नजम, तृतीय से-एकांश ढींगरा, चतुर्थ से-साक्षी गोयल, पांचवी से-मध्यम गर्ग, छठी से-दिविक कुच्छल, सातवीं से-आदित्य मित्तल, आठवीं से अबुजैद खान, नवीं से रिद्धि गुलाटी तथा कक्षा ग्यारह-मानविकी संकाय से गुंचा जैन, कामर्स से-अवनि जैन तथा विज्ञान संकाय से शिवम् पँवार रहे। साथ ही उनके अध्यापकों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के दो छात्र आदित्य ऐरन तथा शौर्य पंवार ने शैक्षिक सत्र 2021-2022 में अपने शिक्षण के साथ-अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करते हुए आईआईटी रूड़की तथा आईआईटी गुहावटी जैसी सम्मानित संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।

 

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