हर बुखार डेंगू नहीं होता, घबराएं नहीं, लक्षण देखकर जांच कराएं : डा. जाहिद
 

 
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शामली। हर बुखार डेंगू नहीं होता है। इसलिए बुखार आए तो घबराने की जरूरत नहीं है। लक्षण के आधार पर जांच करा लेनी चाहिए। यदि जांच में डेंगू पॉजिटिव आता है, तो लक्षण के अनुसार सिम्टोमेटिक इलाज चलता है। यानि, बुखार है तो बुखार की दवा और दर्द है तो दर्द की दवा दी जाती है। डेंगू के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है। यदि मरीज को ब्लीडिंग होने लगे या प्लाज्मा लीक करने लगे तो तुरंत अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराना चाहिए। यह कहना है नोडल अधिकारी डॉ. जाहिद अली का।
नोडल अधिकारी डॉ. जाहिद अली ने बताया डेंगू के मच्छर बहुत तेजी से पनपते हैं। वैसे एक हजार मीटर के ऊपर डेंगू के मच्छर नहीं मिलते हैं। मधुमेह, बीपी या फिर बुजुर्ग मरीज डेंगू की चपेट में आएं तो उन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वैसे डेंगू का बुखार तीन से पांच दिन में उतरने लगता है। बुखार तेज आता है। दो दिन में 103-104 डिग्री फारेनहाइट आता है। प्लेटलेट्स काउंट यदि 10 हजार से कम हो जाए तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ध्यान देना चाहिए कि हर चार घंटे पर मरीज पेशाब करता है या नहीं।
उन्होंने कहा बुखार के कई कारण हो सकते हैं। हर बुखार डेंगू नहीं होता है। टाइफाइड, , मलेरिया या किसी अन्य इनफेक्शन से भी बुखार हो सकता है। बुखार कोई बीमारी नहीं, बल्कि बीमारी का लक्षण होता है। बुखार आने पर किसी स्‍थानीय चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा जिले में बुखार से पीड़ित मरीजों की स्तिथि सामान्य है। केवल एहतियात बरतने की जरूरत है। प्लेटलेट्स कम होने पर घबराएं नहीं। यदि कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो डॉक्टर को दिखाएं।
डेंगू के लक्षण
अचानक तेज बुखार।
सिर में आगे की और तेज दर्द।
आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी।
मांसपेशियों (बदन) व जोडों में दर्द।
स्‍वाद का पता न चलना व भूख न लगना।

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