मां को लेकर घूमता रहा,नहीं मिली ऑक्सीजन, पीडि़त के सामने हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने 6  सिलेंडर गाडी चालक को बेचे

 
मां को लेकर घूमता रहा,नहीं मिली ऑक्सीजन, पीडि़त के सामने हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने 6 सिलेंडर गाडी चालक को बेचे

जानसठ। कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है और रोजाना कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर मौत हो रही है। ऐसी स्थिति में अस्पतालों में अव्यवस्था का बोलबाला है, जबकि ऐसी स्थिति में अस्पतालों में व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, लेकिन वहां का हाल उलटा है। आलम यह है कि सीएससी जानसठ पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को भर्ती तक नहीं कर रहे हैं, बल्कि रैफर का प्रचार थमा कर इतिश्री हासिल करने में महारत हासिल कर रहे है, जबकि अस्पताल में बेड खाली हैं। इन्हीं अव्यवस्थाओं का खामियाजा एक युवक और उसकी मां को भुगतना पड़ रहा है।

जानसठ नगर निवासी एक युवक अपनी मां को आक्सीजन की कमी होने पर सीएचसी जानसठ पर पहुंचा और इलाज के लिए अस्पताल में इधर-उधर घूमता रहा, जब कहीं चिकित्सक नजर नहीं आए, तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। काफी देर के बाद इक्का-दुक्का स्वास्थ्यकर्मी उसको दिखाई दिए, तो उसने उनसे अपनी मां के इलाज की गुहार लगाई। लेकिन उसे इलाज के नाम पर मिला तो सिर्फ रेफर का पर्चा। युवक का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जानसठ में मां को भर्ती करने के लिए मिन्नत की, लेकिन स्टाफ का दिल नहीं पसीजा। आक्सीजन न होने का हवाला देकर उन्होंने भर्ती करने से मना कर दिया और उसको रेफर कर दिया गया।

ऐसे मामले को लेकर सीएससी जानसठ अक्सर सुर्खियों में रहता है। इससे पूर्व में भी नगर की एक महिला ने चिकित्सकों की लापरवाही के चलते कोरोना सैंपल गायब होने की बात कही थी, हालांकि लगभग एक सप्ताह के बाद उसकी रिपोर्ट उस समय प्राप्त हुई, जब मामला मीडिया की सुर्खी बना कुछ लोगों का दबी जुबान में यह भी कहना है कि ऑक्सीजन की सुविधा सिर्फ उनको दी जा रही है, जो सुविधा शुल्क के रूप में बढिय़ा खर्च करते हैं।
बहरहाल इस तरह तो डॉक्टर को भगवान का दर्जा देने वाले लोगों का विश्वास उठ जाएगा। पीडि़त ने बताया कि जब वह अपनी मां को लेकर कार द्वारा बाहर जा रहा था, तो रास्ते में नहर के पास सीएचसी जानसठ के एंबुलेंस मिली, जिसमें जानसठ हॉस्पिटल का ही एक स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था। उसने पीडि़त के सामने ही नहर पर एक गाड़ी चालक को 6 ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक के रूप में पीडि़त के सामने ही बेच दिए, जिससे पीडि़त आहत हुआ है जबकि योगी सरकार का कहना है कि हमारे यहां ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, लेकिन लाखों रुपए डकारने वाले सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर मरीजों पर भी इस प्रकार से दया नहीं कर रहे हैं और अपनी पेट पूजा में लगे हुए हैं। सरकारी डॉक्टर को सरकार की सभी सेवाएं मुफ्त में चाहिए, लाखों रुपए प्रतिमाह भी चाहिए और आवास विकास भी चाहिए गाड़ी एंबुलेंस और स्वास्थ्य की सुविधाएं भी चाहिए और इस प्रकार ब्लैक से रुपया भी चाहिए, लेकिन मरीज पर कोई दया नहीं चाहिए, पहले से ही डॉक्टर को भगवान के रूप में पूजा जाता है, लेकिन कलयुग का समय देखकर अस्पतालों में मरीजों के साथ राक्षसों जैसा बर्ताव किया जाना निंदनीय का विषय है।
वहीं दूसरी ओर सीएचसी प्रभारी डॉक्टर अशोक कुमार का कहना है कि सीएचसी में ऑक्सीजन मौजूद है और अगर कोई मरीज आता है, तो उसको जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन दी जाएगी।

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