उत्तराखंड और गुजरात में मुख्यमंत्री की नेम प्लेट बदलने से लोगों का भाजपा के प्रति गुस्सा कम नहीं होने वाला :  राघव चड्ढा

 
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि उत्तराखंड और गुजरात में मुख्यमंत्री की नेम प्लेट बदलने से लोगों का भाजपा के प्रति जो गुस्सा और आक्रोश है वह नहीं बदलेगा। आम आदमी पार्टी के रूप में एक मजबूत विपक्ष से चुनौती मिलने पर भाजपा सीएम बदलने के लिए मजबूर हुई।‌ कांग्रेस एक अप्रभावी और असफल विपक्ष‌ साबित हुई। जिसे आम आदमी पार्टी ने सफलतापूर्वक रिप्लेस कर दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच म्यूजिकल चेयर का खेल ' आप' के आने से खत्म हो गया। आम आदमी पार्टी ने मजबूत विपक्ष बनने के बाद भाजपा-कांग्रेस को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, गुस्से और नाराजगी को राजनीतिक सत्ता में पलटने की क्षमता नहीं है। दोनों राज्यों में ना बीजेपी ने मजबूत सरकार दी और ना ही कांग्रेस ने मजबूत विपक्ष दिया। गुजरात में भाजपा सरकार डबल इंजन वाली सरकार नहीं है, यह पीएम मोदी और अमित शाह की बेड़ियों में जकड़ी डबल-रिमोट वाली नियंत्रित सरकार है। भाजपा को जितने लोग वोट नहीं देना चाहते हैं, उससे भी ज्यादा लोग कांग्रेस को भी वोट नहीं देना चाहते हैं। अब 'आप' ही एकमात्र उम्मीद है। दोनों राज्यों में ऐसे लोग जो ना तो भाजपा को वोट देना चाहते हैं और ना कांग्रेस को व‌ोट देना चाहते हैं। वे आम आदमी पार्टी की ओर देख रहे हैं। कांग्रेस 'मित्र विपक्ष' हुआ करती थी, अब 'मृत विपक्ष' है। 
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक राघव चड्ढा ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित किया। राघव चड्ढा ने कहा कि बहुत लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच बहुत सुविधाजनक म्यूजिकल चेयर्स का खेल चलता आ रहा है कि 5 साल आप राज करिए और 5 साल हम राज करेंगे। अगर आप सत्ता में होंगे तो  सरकार में हमारी पार्टनरशिप चलेगी और सरकार के बाहर भी हम पार्टनरशिप में काम करेंगे। इस तरह आपस में बेहद सुविधाजनक समझ के साथ सरकार चलाते थे। जिसका परिणाम यह निकला कि उत्तराखंड-गुजरात में भारतीय जनता पार्टी एक मजबूत सरकार नहीं दे पाई और ना ही कांग्रेस पार्टी एक मजबूत विपक्ष दे पायी। इन राज्यों में जब अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने प्रवेश किया तो दोनों प्रदेशों की जनता को अनुभव हुआ कि एक मजबूत प्रभावशाली विपक्ष क्या होता है? भाजपा के लिए कैसे एक छोटी सी पार्टी सैद्धांतिक चुनौती बन जाती है। 
राघव चड्ढा ने कहा कि दूसरी बात कांग्रेस जो एक अप्रभावी और निष्फल विपक्ष थी, वह पीछे होती गई। आम आदमी पार्टी ने उसको खदेड कर मुख्य विपक्ष की भूमिका पर कब्जा कर लिया। तीसरी बड़ी बात आम आदमी पार्टी ने मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाते हुए बीजेपी को चुनौती दी। बीजेपी को काम करो या कुर्सी छोड़ने पर मजबूर किया। आम आदमी पार्टी की चुनौती से भाजपा उत्तराखंड और गुजरात में अपने मुख्यमंत्रियों को बदलने पर मजबूर हो गई। आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की यह ताकत है। गुजरात-उत्तराखंड के लोगों का भाजपा के प्रति जो गुस्सा है वो नेम प्लेट बदलने से नहीं बदलेगा। इन दोनों राज्यों में जितने लोग भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देना चाहते हैं। उससे ज्यादा लोग कांग्रेस को वोट नहीं देना चाहते हैं। इसके कारण एक बहुत बड़ा खाली स्थान पैदा हो गया, जिसको आम आदमी पार्टी ने सफलतापूर्वक भरा है। 
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की पांच साल आप लूटो, पांच साल हम लूटों वाले समझौते को चुनौती दी है। कोविड-19 महामारी में आम आदमी पार्टी के अजय कोठियाल और सभी कार्यकर्ताओं ने मिलकर काम किया। जिसके चलते उत्तराखंड के लोगों को अहसास हुआ कि त्रिवेंद्र रावत की सरकार और नए मुख्यमंत्री की सरकार निकम्मी-निठल्ली सरकार है। असलियत में काम तो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी वाले लोग ही करते हैं। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उत्तराखंड जाकर वहां के जीरो वर्क चीफ मिनिस्टर त्रिवेंद्र रावत को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि अपनी सरकार के 5 बड़े काम गिनवाओ। पांच काम गिनवाने की चुनौती के कुछ घंटों बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने जीरो वर्क चीफ मिनिस्टर त्रिवेंद्र रावत को इस्तीफा दिलवा कर पद से हटा दिया। नए मुख्यमंत्री आए जिनको आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और  फौजी कर्नल अजय कोठियाल ने चुनौती दी कि नए मुख्यमंत्री को 6 महीने में विधायक भी बनना है। गंगोत्री उप चुनाव में मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लडूंगा। इस चुनौती के 24 घंटे के भीतर भारतीय जनता पार्टी ने अपना वो मुख्यमंत्री भी बदल दिया। आम आदमी पार्टी ने देव भूमि उत्तराखंड में केजरीवाल की बिजली गारंटी नाम से अभियान शुरू किया। छोटे से देवभूमि राज्य में आम आदमी पार्टी ने 13 लाख परिवारों को केजरीवाल बिजली गारंटी योजना से जोड़ा। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने ओपन यूनिवर्सिटी जॉब घोटाला से लेकर देवस्थानम बोर्ड सहित कई बड़े खुलासे किए। जिसके चलते उत्तराखंड के राज्यपाल तक को इस्तीफा देना पड़ गया। यह आम आदमी पार्टी की उपलब्धि  है।
दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि गुजरात को भाजपा की राजनीतिक प्रयोगशाला और गढ़ कहा जाता है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह दोनों गुजरात सूबे से आते हैं। गुजरात में 27 साल से भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर काबिज है। उसके गढ के भीतर गढ़, सूरत में जाकर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भाजपा को टक्कर देकर 27 सीटें जीतीं हैं। सूरत में आम आदमी पार्टी का झंड़ा लहराया है। अगर सूरत के लोग भाजपा के 27 साल के कुशासन से परेशान थे तो विपक्ष कही जाने वाली कांग्रेस को वोट देना चाहिए था। सूरत के लोगों ने ना भाजपा को वोट दिया और ना ही कांग्रेस को वोट दिया। सूरत के लोगों ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को वोट दिया। इसलिए दिया क्योंकि आम आदमी पार्टी एक उम्मीद है। काम की राजनीति पर बात करने वाली है। केजरीवाल मॉडल ऑफ गर्वेनेंस को गुजरात तक लेकर जाने वाली ‘आप’ को लोगों ने अपनी पसंद बनाया। भाजपा के लोग गुजरात और उत्तराखंड में वोट मांगने जाते हैं तो वहां के लोग कहते हैं कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने स्कूल-अस्पताल आलीशान कर दिए, बिजली-पानी मुफ्त कर दी। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना शुरू कर दी और महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त कर दी, तुमने इतने सालों में क्या किया है। भाजपा-कांग्रेस से अब काम पर सवाल किया जा रहा है, इसलिए भाजपा मुख्यमंत्री को बदलने के लिए मजबूर है। 
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की छोटी से छोटी नुक्कड़ सभा में भी कांग्रेस की बड़ी रैलियों के मुकाबले ज्यादा भीड़ आती है। बड़े पत्रकार-व्यावसायी अपनी नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी के साथ आए है। जिस रफ्तार से गुजरात में आम आदमी पार्टी का परिवार बढ़ रहा है, उससे गुजरात में बैठी भाजपा और दिल्ली में बैठे नरेंद्र मोदी-अमित शाह घबराए हुए हैं। यह देश की आम आदमी की ताकत है। 
भाजपा के 27 साल के गुजरात कुशासन के बारे में जितनी एंटी इनकंबेंसी और गुस्सा लोगों का इस समय भाजपा के लिए है, उसे कांग्रेस दूर नहीं कर सकती। अगर 27 साल से लोगों के मन में भाजपा के प्रति इतना गुस्सा था कि सूरत के लोगों ने एकजुट होकर आम आदमी पार्टी को वोट दिया और कांग्रेस को वोट नहीं दिया। यह वह दिखाता है कि 27 साल तक कांग्रेस कभी भी बीजेपी को टक्कर नहीं दे सकी। इसलिए भाजपा-कांग्रेस को जो लोग वोट नहीं देना चाहते हैं, वह बड़ी उम्मीद के साथ आम आदमी पार्टी की तरफ देख रहे हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले चुनाव में रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कहा करते थे कि गुजरात में भाजपा की सरकार लाइए। इससे डबल इंजन की सरकार चलेगी। हकीकत में यह डबल इंजन की सरकार नहीं है, यह डबल रिमोट कंट्रोल की सरकार है। जिसमें एक रिमोट कंट्रोल मोदी और रिमोट कंट्रोल अमित शाह के पास है। असहाय मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के पास कोई रिमोट कंट्रोल नहीं था। इसलिए भाजपा असहाय मुख्यमंत्री को हटाकर आने वाले चुनावों से पहले नेम प्लेट बदलने की कोशिश कर रही है। नेम प्लेट बदलने से लोगों के मन में बीजेपी को बदलने के जो भाव है, वह नहीं बदलेंगे। लोगों ने बीजेपी को बदलने का मन बना लिया है। 
 

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