20 दलों के साथ सीपीआईएम किसानों के मुद्दे संसद में उठाएगी

 
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नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी) ने केंद्र से मांग की है कि किसानों पर से मुकदमों, गिरफ्तारी, मानहानि में मामले वापस लिया जाएं। विपक्ष की 20 पार्टियों के सहयोग से सीपीआईएम ये मुद्दा संसद में उठायेगी। सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा, सभी बाधाओं के बावजूद, किसानों ने सड़क पर सभी प्रकार के गतिरोधों का सामना किया। शारीरिक हमलों, झूठे मुकदमों, गिरफ्तारी, मानहानि और हत्याओं के आरोप झेले। आजादी के बाद, यह एक ऐतिहासिक, सबसे निरंतर शांतिपूर्ण संघर्ष रहा है।

उन्होंने कहा कि किसानों पर लगाए गए मुकदमे केंद्र सरकार को वापस लेना चाहिए। हमें इस संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले 750 से अधिक किसानों के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। वे हमारे शहीद हैं। इसलिये सीपीआईएम केंद्र सरकार से उनके मुआवजे के मांग करती है।

येचुरी ने कहा, हम देश के लोगों और केंद्र सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि इन्हीं किसानों को, खालिस्तानी बताया गया। सरकार को किसानों को हर फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करना चाहिए।

आज ये केवल किसानों की जीत नहीं है, ये देश के सभी लोगों की जीत है जो संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करते हुए संसद को एमएसपी को कानूनी अधिकार के रूप में अधिनियमित करना चाहिए। 750 से अधिक किसान शहीद हुए फिर भी प्रधानमंत्री ने खेद नहीं जताया।

उन्होंने केंद्र की सरकार पर आरोप लगाया कि झूठे मामलों के जरिए सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा निशाना बनाए गए लोगों के लिए न्याय की तलाश जारी रहेगी। विपक्ष इस मुद्दे पर हमेशा से एकजुट है। 20 विपक्षी दलों ने मिलकर केंद्र से इस कानून को वापस लेने की मांग की है। अब ये सभी विपक्षी दल मिलकर सरकार इन किसानों पर लगे मुकदमे वापस लेने की मांग करेंगे।

गौरतलब है कि तीन कृषि कानून वापस लेने के अलावा किसान संगठनों की कुछ और मांगें हैं। जिसको लेकर ये धरने पर बैठे हैं। जिसके तहत कानूनन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी, बिजली एक्ट, पराली एक्ट को रद्द करना, प्रदर्शनकारियों पर लिखे गए मुकदमों को वापस लेना, मुआवजा शामिल है।

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