गूगल ने भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षक फातिमा को दी श्रद्धांजलि

 
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कोलकाता। भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षक और नारीवादी आइकन फातिमा शेख को सम्मानित करने के लिए गूगल ने रविवार को उनको एक डूडल समर्पित किया।

साथी समाज सुधारकों ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले के साथ फातिमा ने 1848 में स्वदेशी पुस्तकालय की सह-स्थापना की थी। यह पुस्तकालय लड़कियों के लिए भारत के पहले स्कूलों में से एक था।

फातिमा शेख का जन्म 09 जनवरी 1831 में पुणे में हुआ था। वह अपने भाई मियां उस्मान शेख के साथ रहती थीं। जब ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले को दलितों को शिक्षित करने के प्रयास में बेदखल कर दिया गया था तब शेख बहन-भाई ने उन्हें अपने घर में जगह दी थी।

स्वदेशी पुस्तकालय शेख परिवार की छत के नीचे खुला। वहां सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख ने हाशिए के दलित और मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को पढ़ाया, जिन्हें वर्ग, धर्म या लिंग के आधार पर शिक्षा से वंचित किया गया था।

भारत की निचली जातियों में पैदा हुए लोगों को शैक्षिक अवसर प्रदान करने के ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले के प्रयासों को सत्यशोधक समाज आंदोलन के रूप में जाना जाने लगा।

समानता के इस आंदोलन के लिए शेख ने घर-घर जाकर अपने समुदाय के दलितों को स्वदेशी पुस्तकालय में सीखने और भारतीय जाति व्यवस्था की कठोरता से बचने के लिए आमंत्रित किया।

उन्हें प्रभुत्वशाली वर्गों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। इन वर्गों ने सत्यशोधक आंदोलन में शामिल लोगों को अपमानित करने का प्रयास किया, लेकिन शेख और उनके सहयोगी डटे रहे।

शेख की कहानी को ऐतिहासिक रूप से अनदेखा कर दिया गया है, हालांकि केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में अन्य अग्रणी भारतीय शिक्षकों के साथ उर्दू पाठ्यपुस्तकों में उनके जीवन को प्रदर्शित करके उनकी उपलब्धियों पर नई रोशनी डाली है।

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