इंटरपोल ने लॉरेंस बिश्नोई के दो गुर्गों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया
नई दिल्ली। इंटरपोल ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े अपराधियों कपिल सांगवान उर्फ नंदू और विक्रमजीत सिंह के खिलाफ दो रेड नोटिस जारी किए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों ने बताया कि ये गैंगस्टर विदेश से गिरोह का संचालन कर रहे हैं। वे विदेश भाग गए हैं और वहां से बिश्नोई गिरोह […]
नई दिल्ली। इंटरपोल ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े अपराधियों कपिल सांगवान उर्फ नंदू और विक्रमजीत सिंह के खिलाफ दो रेड नोटिस जारी किए हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों ने बताया कि ये गैंगस्टर विदेश से गिरोह का संचालन कर रहे हैं। वे विदेश भाग गए हैं और वहां से बिश्नोई गिरोह का नेटवर्क चला रहे हैं।
संदेह है कि विक्रमजीत सिंह, जिसे विक्रम बराड के नाम से भी जाना जाता है, दुबई में छिपा हुआ है जबकि कपिल सांगवान के ब्रिटेन में छिपे होने की आशंका है।
ये भी पढ़ें पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पश्चिमी एशिया के हालातों पर सरकार की अहम बैठकसांगवान कई आपराधिक मामलों और प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच हुए गैंगवारों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के रडार पर भी है।
ये भी पढ़ें ISRO और AIIMS के बीच समझौता: अंतरिक्ष यात्रा का मानव शरीर पर असर जानने के लिए होगी रिसर्चएनआईए ने हाल ही में अलग-अलग मामलों में दोनों अपराधियों से संबंधित कई ठिकानों पर छापेमारी की। गैंगस्टरों ने दूसरे गिरोहों के साथ मिलकर ‘महागठबंधन’ भी बनाया था। गैंगस्टरों के महागठबंधन में ग्रुप ए नीरज बवाना का था।
सूत्र ने कहा, “नीरज बवाना के महागठबंधन में सौरभ उर्फ गौरव, सुवेघ सिंह उर्फ सिब्बू, शुभम् बालियान, राकेश उर्फ राका, इरफान उर्फ छेनू, रवि गंगवाल और रोहित चौधरी और दविंदर बंबीहा गैंग हैं।”
लॉरेंस बिश्नोई के गठबंधन (टीम बी) में संदीप उर्फ काला जटेहड़ी, कपिल सांगवान उर्फ नंदू, रोहित मोई, दीपक बॉक्सर, प्रिंस तेवतिया, राजेश बवानिया और अशोक प्रधान शामिल थे।
सूत्रों ने बताया कि गैंगस्टरों के इन दोनों महागठबंधनों ने कई राज्यों में उत्पात मचाया था और गैंगवॉर भी कर रहे थे।
इंटरपोल के अनुसार, रेड नोटिस दुनिया भर में कानून प्रवर्तन से प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए लंबित किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने का अनुरोध है। यह अनुरोध करने वाले देश में न्यायिक अधिकारियों द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट या अदालती आदेश पर आधारित है। किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना है या नहीं, यह तय करने में सदस्य देश अपने स्वयं के कानून लागू करते हैं।
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