राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता नरसिंह यादव की नजरें बमिर्ंघम कॉमनवेल्थ गेम्स पर

 
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नई दिल्ली। 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और 2014 के एशियाड कांस्य विजेता नरसिंह यादव मुंबई में हैं। उनको इसकी आशंका है कि कही कोविड के चलते जिम जैसी सुविधाओं को बंद न कर दिया जाए। अगर सुविधाओं को बंद किया जाता है तो इस साल होने वाले बमिर्ंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उनके अभ्यास में भी थोड़ा फर्क पड़ सकता है। यादव ने कहा, "मैं 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में अपने स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद कर रहा हूं, लेकिन वह महामारी की तीसरी लहर के खिलाफ हैं। मैं अभी भी अपना प्रशिक्षण लगातार कर रहा हूं, लेकिन धीरे-धीरे जिम और प्रशिक्षण सुविधाएं बंद की जा रही हैं।"

"जिस तरह से कोविड फैल रहा है, उसे देखते हुए मैं भी अब और अधिक सतर्क हो गया हूं। मैं केवल यह आशा करता हूं कि स्थिति इस हद तक नहीं बिगड़े कि सरकार को लॉकडाउन लगाने की आवश्यकता पड़े।"

13 साल की उम्र में पहलवान बनने के लिए प्रशिक्षण शुरू करने वाले नरसिंह यादव दूध बेचने वाले के बेटे हैं। उनका जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने नई दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता, उसके बाद 2014 एशियाई खेलों और 2015 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है।

यादव ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इस साल राष्ट्रमंडल खेल भी मेरे लिए वैसे ही होंगे जैसे 2010 में हुए थे। मेरी ट्रेनिंग बहुत अच्छी चल रही है।"

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपनी पत्नी शिल्पी श्योराण के साथ प्रशिक्षण लेते हैं, जो 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में 63 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक विजेता थीं। यादव ने कहा, "मैं और मेरी पत्नी एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं और मुझे उनका पूरा समर्थन मिलता है।"

क्या एक पुलिस अधिकारी होने के कारण अपनी कुश्ती को अपने काम से संतुलित करना मुश्किल हो जाता है। यादव ने कहा, "मेरे अधिकारी मुझे बहुत समर्थन देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि मैं देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं।"

यादव ने कहा कि वह अपने पोषण विशेषज्ञ की मदद से अपने प्रतिस्पर्धा के वजन को बनाए रखते हैं।

 

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