योगी सरकार की प्रभावी पैरवी का नतीजा, माफिया मुख्तार को तीन दिन में दो मामलों में मिली सजा

 
योगी सरकार की प्रभावी पैरवी का नतीजा, माफिया मुख्तार को तीन दिन में दो मामलों में मिली सजा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में माफिया की कमर तोड़ने की मुहिम छेड़ रखी है, जिसका नतीजा है कि जो काम 44 वर्षों में नहीं हो पाया वो तीन दिन में हो गया है। एक समय तक गवाहों और सबूतों के अभाव में निचली अदालतों से बरी हो चुके दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी को 21 सितम्बर को जेलर को धमकाने के मामले में सजा मिली थी। वहीं, शुक्रवार को एक अन्य मामले में दोषी पाते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने मुख्तार को सजा सुनाई है।

मुख्तार की गिनती प्रदेश के उन अपराधियों में होती है जिसे 80 से 90 के दशक तक कांग्रेस और उसके बाद सपा और बसपा की सरकारों ने संरक्षण दिया। कट्टे से राजनेता तक का सफर तय करने वाले इस माफिया के पैरों के नीचे की जमीन तब खिसकना शुरू हुई जब उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनी। सरकार ने मुख्तार के आपराधिक किले को ढहाने के लिए पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच समन्वय स्थापित कर उच्च न्यायालय में मुख्तार के खिलाफ प्रभावी पैरवी की। इससे 1999 में दर्ज हुए गैंगेस्टर एक्ट के मामले में उसे पांच साल की सजा हुई। साथ ही 23 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने यह निर्णय राज्य सरकार की अपील पर दिया है। बता दें कि, राज्य सरकार ने मुख्तार को गैंगस्टर के इस मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी। इस मामले की वर्ष 1999 में लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज है।

इस मामले में हुई है पांच साल की सजा

जेल में सुधार के लिए चर्चित जेल अधीक्षक रमाकांत तिवारी की चार फरवरी 1999 को हत्या कर दी गई थी। वह तत्कालीन जिलाधिकारी सदाकांत के आवास से बैठक कर शाम सात बजे लौट रहे थे। राजभवन के पास पहुंचते ही बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, तत्समय चर्चित छात्र नेता वर्तमान में अयोध्या गोसाईगंज से सपा विधायक अभय सिंह समेत दर्जन भर से अधिक लोग नामजद हुए थे।

क्या था 2003 में जेलर को धमकाने का केस

इससे पहले 21 सितम्बर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने साल 2003 में जेलर एसके अवस्थी को धमकाने के एक मामले में सजा सुनाई थी। इस मामले में जेलर अवस्थी ने जेल में मुख्तार से मिलने आए लोगों की तलाशी लेने का आदेश दिया था। इस पर मुख्तार ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। साथ ही उनके साथ गाली-गलौज करते हुए उन पर पिस्तौल भी तान दी थी।

22 महीनों के अथक प्रयासों के बाद माफिया को पंजाब से यूपी लाई योगी सरकार

योगी सरकार ने जब माफिया मुख्तार और उसके गुर्गों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार उसे संरक्षण देने के लिए उस पर एक फर्जी मुकदमा दर्ज करवाकर उसे पंजाब के रोपड़ जेल ले गई। उस जेल में मुख्तार बीस लोगों के बैरक में अकेला वीआइपी की तरह अपनी पत्नी के साथ रहता था। यूपी सरकार ने जब मुख्तार को वापस उत्तर प्रदेश लाना चाहा तो कांग्रेस सरकार ने खूब रोड़े अटकाए। वह नहीं चाहती थी कि मुख्तार अंसारी को यूपी की जेल में स्थानांतरित किया जाए। कांग्रेस सरकार ढाई साल तक मुख्तार अंसारी को बचाती रही। वहीं माफिया के आपराधिक सम्राज्य को ध्वस्त करने और उसके गुनाहों का हिसाब कराने में जुटी योगी सरकार ने मुख्तार को लाने के लिए 22 महीनों तक अथक प्रयास किया और सुप्रीम कोर्ट तक गई। साथ ही मजबूत पैरवी की, जिसका नतीजा रहा कि अप्रैल 2021 में उसे वापस यूपी लाया गया और तबसे वह बांदा जेल में बंद है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को धार देने के लिए एक दुर्दांत अपराधी के प्रति सहानभूतिपूर्ण रवैया अपनाते हुए पूरे मामले पर चुप्पी साधे रही।

माफिया की अवैध संपत्ति पर चला बुलडोजर

पुलिस ने अवैध रूप से कमाई गई मुख्तार और उसके शागिर्दों की 1057 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त की है। यूपी पुलिस ने अब तक मुख्तार की 248 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है, जबकि 282 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चला है। सरकार ने गैंगस्टर एक्ट के तहत माफिया और उसके करीबियों की 246 करोड़ 65 लाख 90 हजार 939 रुपए की संपत्तियां जब्त की है। अवैध कब्जे से करीब 281 करोड़ की संपत्तियां या तो मुक्त कराई गई हैं या ध्वस्त कर दी गई।

इन मामलों में सजा का फैसला बाकी

पूर्वांचल की धरती को निर्दाेषों के खून से लाल करने वाले माफिया मुख्तार पर पूरे देश में 59 मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:

22 जनवरी 1997 के वाराणसी भेलूपुर में पूर्वांचल के सबसे बड़े कोयला व्यापारी और विश्व हिंदू परिषद कोषाध्यक्ष नन्दकिशोर रूंगटा हत्याकांड मामला

29 नवंबर 2005 में गाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की गाज़ीपुर की बसनिया चट्टी में हुई हत्या मामला

अगस्त 1991 को वाराणसी के चेतगंज में हुई कांग्रेस पूर्व विधायक अजय राय के भाई अवधेश राय हत्याकांड मामला

2009 में गाजीपुर में हुई चर्चित ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह सहित तीन लोगों की हत्या मामला


 

From around the web