आलू,गन्ना के बाद अब प्याज में आत्मनिर्भर होगा किसान, मिलेगा 12 हजार प्रति हैक्टेयर अनुदान

 
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मेरठ। आलू, गन्ना और खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश और पश्चिमी उप्र भले ही अव्वल हो, लेकिन प्याज की खपत पूरी करने के लिए महाराष्ट्र,कर्नाटक, राजस्थान व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का मुंह ताकना पड़ता है। प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है। जबकि उत्पादन मात्र 4.7 लाख मीट्रिक टन हो पाता है। प्याज उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए कम सिंचाई वाले इलाकों को चिन्हित करके विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसकी शुरुआत इसी खरीफ सीजन से होगी।
उद्यान विभाग के अनुसार अभी प्रदेश में 28,538 हेक्टेयर भूमि पर प्याज की खेती की जा रही है। आत्मनिर्भरता पाने के लिए प्याज की खेती के क्षेत्रफल को एक लाख हेक्टेयर करने की जरूरत है। यानी तीन गुना रकबा बढ़ाने की आवश्यकता है। प्याज उत्पादन के लिए उन इलाकों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां जल भराव नहीं होता है। इसके तहत पश्चिमी उप्र के मुजफ्फरनगर,मेरठ, बिजनौर के अलावा बुंदेलखंड व बृज क्षेत्र के अलावा गंगा के किनारे बसे वाराणसी, जौनपुर, मीरजापुर, गाजीपुर, कौशांबी, कानपुर, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज व इटावा में प्याज की खेती को बढ़ावा देने की योजना है।


किसानों को दिया जाएगा अनुदान

प्याज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाएगा। किसानों को उन्नत प्रजाति के एग्रीफाउंड डार्क रेड, भीमा सुपर तथा लाइन 883 बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अमूमन एक हेक्टेयर में करीब 50 हजार रुपये की लागत से 150 से 200 क्विंटल प्याज की पैदावार होती है।


उद्यान विभाग के अफसरों ने तैयार की योजना

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्याज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्याज की खेती के क्षेत्रफल को एक लाख हेक्टेयर तक किए जाने की जरूरत है। जब एक लाख हेक्टेयर भूमि में प्याज की खेती होने लगेगी तब ही सूबे की जरूरत के मुताबिक प्याज का उत्पादन हो पाएगा। यह कठिन कार्य है पर इसे किया जा सकता है। उद्यान विभाग के अफसरों ने इसके लिए एक कार्ययोजना तैयार की है। इसके अनुसार हर जिले में उन इलाकों को चिन्हित किया गया है, जहां बरसात में पानी का भराव नहीं होता।

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