मंत्री डॉक्टर धर्मेश ने दिखाये तेवर, दो घंटे में राजनाथ सिंह से कराया डी.ई.ओ. का तबादला

 
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आगरा,  सामान्य तौर पर शांत स्वभाव वाले उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री डा. जी. एस. धर्मेश ने यहां स्थित रक्षा संपदा कार्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायताें का हवाला देते हुये रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात कर छावनी बोर्ड के रक्षा सम्पदा अधिकारी (डी.ई.ओ.) राजीव कुमार का दो घंटे के भीतर तबादला करा दिया।
इससे पहले नरम रुख रखते हुये डा. धर्मेश चार बार स्वयं डी.ई.ओ. के कार्यालय गए और उनसे व्यापारियों के हितों की रक्षा करने का अनुरोध किया, लेकिन डी.ई.ओ. ने उनका अनुरोध मानने से इंकार कर दिया।
इससे नाराज डा. धर्मेश ने शुक्रवार को दिल्ली जाकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उन्हें डी.ई.ओ. की हठधर्मिता से अवगत कराया। मुलाकात के दौरान उनके साथ पूर्व विधायक व भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशो मेहरा भी थे। उन्होंने राजनाथ सिंह से कहा कि डी.ई.ओ. ने नौ साल पुराने एक फैसले का हवाला देते हुये आगरा के छावनी क्षेत्र में स्थित सदर बाज़ार की कई दुकानों को तुड़वा दिया है। इससे व्यापारियों के समक्ष रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और उनमें बेहद आक्रोश है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डा. धर्मेश की बात को गंभीरता से लेते हुये रक्षा सचिव को इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिये। डा. धर्मेश का कहना है कि दो घंटे बाद ही डी.ई.ओ. के तबादले का आदेश जारी कर दिया गया।
डा. धर्मेश ने  बताया कि आगरा का रक्षा संपदा कार्यालय पूरी तरह भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। छावनी क्षेत्र में पहले तो निर्माण कार्यों की अनदेखी की जाती है और निर्माण पूर्ण हो जाने पर अधिकारी व कर्मचारी वसूली के लिए निकल पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में सदर बाज़ार के कुछ दुकानदारों के साथ ऐसा ही किया गया। डा. धर्मेश ने कहा कि जब इन दुकानदारों को लेकर कोई फैसला यदि वर्ष 2013 में आ चुका था तो नौ साल तक विभाग चुप क्यों बैठा रहा। कोई भी कार्यवाही करने से पहले नोटिस क्यों नहीं जारी किए गए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान चुनावी दौर में इस प्रकार की कार्यवाही व्यापारियों की सरकार के प्रति नाराज़गी भड़काने की साज़िश है, इसे सहन नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह रक्षा संपदा विभाग द्वारा की गयी तोड़-फोड़ के खिलाफ, सदर बाज़ार के दुकानदारों ने दो दिन तक अपनी दुकानें बंद रखी थीं।

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