डेंगू से हाहाकार, स्वास्थ्य विभाग लाचार, झूठे वायदे कर रहे सीएमओ

 
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फर्रुखाबाद। जिले के कायमगंज सहित ग्रामीण क्षेत्र में विचित्र बुखार से लोग लगातार पीड़ित हो रहे हैं। आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिसका अनुमान केवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले बुखार पीड़ितों की संख्या से लगाया जा सकता है।

विडंबना यह है कि यहां टेक्नीशियन मुसाफिर चौहान कहते हैं कि उनके यहां डेंगू की जांच नहीं की जाती है। इसके अलावा अन्य प्रकार की जांचें ही की जा सकती है। कारण कि स्टाफ की कमी के साथ ही जांच के लिए डेंगू की किट ही उपलब्ध नहीं है। जबकि इस सम्बंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा अस्पताल अधीक्षक इसके विपरीत कह रहे हैं कि सीएचसी में डेंगू वार्ड स्थापित है और यहां विचित्र बुखार के उपचार की भी व्यवस्था के साथ ही लैब में हर प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध है। आज विचित्र बुखार से पीड़ित महिला सीमा पत्नी राजीव सिंह निवासी ग्राम जौंरा उपचार के लिए आई। जिन्हें सुविधाओं का अभाव बताकर रेफर कर दिया गया। इससे पहले इन्हीं के परिवार में किशोर अभिषेक तथा 05 वर्ष की मासूम तपस्या भी बुखार से पीड़ित हो चुकी है।

इसके अलावा यहां इस अस्पताल में पिछले कुछ ही दिनों के अंदर अब तक कौशल पुत्र सुरेश अताईपुर, सोनम (12) पुत्री नरेंद्र हजरतपुर, कमला देवी(30)पत्नी सुनील कारब कंपिल, मास्टर ओपी पुत्र वीरे नियामतपुर, आदि क्षेत्रीय मरीज उपचार के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे थे। इन सभी को भी जांच तथा उपचार का अभाव बताकर रेफर किया जा चुका है।

सरकारी अस्पताल में प्राइवेट लैब से कराई जा रही खून की जांच

निशुल्क एवं अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा भारी भरकम बजट जनहित में व्यय किया जा रहा है। किंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज में मरीजों के साथ जानबूझकर खिलवाड़ ही नहीं, बल्कि उनका आर्थिक शोषण करने से भी कोई गुरेज नहीं कर रहा है। इस अस्पताल में खून की जांच के लिए लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति है। डेंगू को छोड़कर शायद सभी जांच किटें भी उपलब्ध है। लेकिन फिर भी यहां आने वाले मरीजों के खून की जांच के लिए अस्पताल के इर्द-गिर्द स्थित प्राइवेट लैब से, वहां के कर्मचारियों को बुलाकर मरीज के ब्लड का सैंपल दिलाया जाता है। सैंपल ले जाकर कुछ देर बाद जांच रिपोर्ट सौंप दी जाती है। इस तरह की जा रही जांच के मनमाने रुपए मजबूर तथा लाचार सामान्य एवं गरीब स्तर के मरीजों से ही भुगतान कराए जाते हैं। इसके पीछे चिकित्सकों को मिलने वाला कमीशन खोरी का राज किसी से छिपा नहीं है। डिप्टी सीएमओ राजीव शाक्य का कहना है कि मामले की जांच करा कर दोषी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

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