बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर,बजट में झूठी उम्मीदें क्योंः मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने केन्द्रीय आम बजट को झूठी उम्मीदों का पुलिंदा बताते हुये बुधवार को कहा कि बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर होता। सुश्री मायावती ने सिलसिलेवार ट्वीट के जरिये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा “ इस वर्ष का बजट भी कोई ज्यादा […]
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने केन्द्रीय आम बजट को झूठी उम्मीदों का पुलिंदा बताते हुये बुधवार को कहा कि बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर होता।
सुश्री मायावती ने सिलसिलेवार ट्वीट के जरिये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा “ इस वर्ष का बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं। पिछले साल की कमियाँ कोई सरकार नहीं बताती और नए वादों की फिर से झड़ी लगा देती है जबकि जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसेे ही दाव पर लगा रहता है जैसे पहले था। लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों।”
उन्होने कहा “ संकीर्ण नीतियों व गलत सोच का सर्वाधिक दुष्प्रभाव उन करोड़ों गरीबों किसानों व अन्य मेहनतकश लोगों के जीवन पर पड़ता है जो ग्रामीण भारत से जुड़े हैं और असली भारत कहलाते हैं। सरकार उनके आत्म-सम्मान व आत्मनिर्भरता पर ध्यान दे ताकि आमजन की जेब भरे व देश विकसित हो। ”
बसपा सु्प्रीमो ने कहा “ देश में पहले की तरह पिछले 9 वर्षों में भी केन्द्र सरकार के बजट आते-जाते रहे जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही, किन्तु वे सब बेमानी हो गए जब भारत का मिडिल क्लास महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि की मार के कारण लोवर मिडिल क्लास बन गया, अति-दुखद। ”
ये भी पढ़ें तेज रफ्तार डंपर का कहर: अमेठी में मॉर्निंग वॉकर्स को डंपर ने रौंदा, एक की मौत, दूसरा गंभीरएक अन्य ट्वीट में उन्होने कहा “ केन्द्र जब भी योजना लाभार्थियों के आँकड़ों की बात करे तो उसे जरूर याद रखना चाहिए कि भारत लगभग 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, वंचितों, किसानों आदि का विशाल देश है जो अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं। उनके लिए बातें ज्यादा हैं। बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर।”
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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