झांसीः विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस: समय पर हो लक्षणों की पहचान तो लाइलाज नहीं बीमारी

 
1

झांसी। ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। यह है ही इतनी खतरनाक बीमारी। इससे भी खतरनाक इसकी समय रहते पहचान कर पाना होता है। यदि इसे समय रहते पहचान लिया जाए और ठीक से उपचार मिल जाए तो इससे निजात भी मिल सकती है। यह कहना है लक्ष्मीबाई मेडिकल काॅलेज के न्यूरोलाॅली विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ.अरविन्द कनकने का।

डॉ.अरविन्द कनकने ने बताया कि वास्तव में ब्रेन ट्यूमर मामले में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती दिनों में आसानी से इसका पता नहीं लगता। आधे मरीज साल भर बाद ही जान पाते हैं कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है। 10 से 15 प्रतिशत मरीजों को पांच साल बाद इसका पता चलता है। लगभग इतने ही मरीज 10 साल बीत जाने के बाद समझ पाते हैं कि वे इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। 

भारत में ब्रेन ट्यूमर प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। कभी इसे बच्चों में अधिक बताया जाता है, तो कभी लड़कियों में इसके ज्यादा होने के आसार बताए जाते हैं। ब्रेन ट्यूमर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, रोग का जल्दी पता लगाने, निदान और देखभाल उपचार प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत भारत सरकार की ओर से की गई है। एक अध्ययन के अनुसार विश्व भर में हर दिन एक लाख मरीजों में से दस लोग ब्रेन ट्यूमर के कारण काल के गाल में समा जाते हैं। 

एशिया पैसिफिक जर्नल की रिसर्च रिपोर्ट 

एशिया पैसिफिक जर्नल की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में मस्तिष्क संबंधी बीमारियों में वृद्धि के साथ, हर साल 2 हजार,500 से अधिक भारतीय बच्चे मेडुलोब्लास्टोमा से पीड़ित होते हैं। भारत में हर साल 40 से 50 हजार लोगों में ब्रेन ट्यूमर का पता चलता है। इनमें से 20 फीसदी बच्चे हैं। एक साल पहले तक यह आंकड़ा केवल 5 फीसदी के आसपास था। पांच भारतीय शहरों (मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर, दिल्ली और भोपाल) में दोनों लिंगों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर का रुझान का पिछले दो दशकों की अवधि में मूल्यांकन किया गया और पाया गया कि कैंसर के कुल मामलों में से पांच से सात प्रतिशत मामले ब्रेन ट्यूमर के हैं। मरीजों में सबसे ज्यादा  महाराष्ट्र में देखने को मिले है। कैंसर के दस प्रतिशत मामले अकेले महाराष्ट्र में देखने को मिलते हैं, जो एक बेहद चिंताजनक स्थिति है।

    

ब्रेन ट्यूमर की 4 अवस्थाएं 

- ब्रेन ट्यूमर की सामान्य अवस्था में मस्तिष्क में ट्यूमर बनना शुरू भर होता है। ट्यूमर की कोशिकाएं बहुत धीमी गति से विकसित होती हैं और मस्तिष्क के दूसरे हिस्सों में इनका फैलाव नहीं होता। इस अवस्था में सर्जरी बेहतर हो सकती है।

- दूसरी अवस्था में कोशिकाएं मेलिग्नेंट प्रकृति की होती हैं और सामान्य कोशिकाओं से छोटी दिखती हैं। इनकी प्रकृति शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलने की होती है। सही समय पर इलाज न किया जाए तो ट्यूमर खतरनाक स्थिति तक बढ़ जाता है।

- अगली अवस्था में ट्यूमर बढ़कर परिपक्वता की स्थिति में पहुंच चुका होता है। कैंसर की कोशिकाएं तेज गति से फैलती हैं और शरीर की तमाम गतिविधियों को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। अब इलाज बेहतर होने से ऐसे मरीज को भी बचाया जा सकता है।

- अंतिम अवस्था अथवा एडवांस स्टेज जानलेवा है। इसमें ट्यूमर पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है। मेलिग्नेंट कोशिकाएं बहुत तीव्र गति से फैलती हैं और शरीर को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। खतरनाक ऊतकों की पहचान बहुत मुश्किल होती है। ऐसे में बचने की गारंटी नहीं होती।

आनुवांशिक हो सकता है 

कभी-कभी कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर आनुवांशिक हो सकता है। हालांकि केवल 5 से 10 प्रतिशत ब्रेन ट्यूमर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता है। वंशानुगत मस्तिष्क ट्यूमर के मामलों में, डीएनए अनुक्रम में एक परिवर्तन होता है जो एक विशिष्ट जीन के जरिये माता-पिता से बच्चे तक पारित होता है। अधिकांश आनुवांशिक जोखिम कारक जन्म के समय मौजूद नहीं होते हैं, लेकिन वास्तव में उम्र के रूप में विकसित होते हैं। हमारे अधिकांश जीन अपेक्षित रूप से अपना काम करते हैं। एक छोटी खराबी कोशिकाओं के बढ़ने के तरीके को बदल सकती है, जिससे अंततः कैंसर का विकास हो सकता है।

ये हैं ब्रेन ट्यूमर के लक्षण 

सवेरे के समय अकसर उल्टी हो, खास तौर से एक जगह से दूसरी जगह जाने पर, तो सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। सिर में दर्द बना रहना ब्रेन ट्यूमर का सबसे बड़ा संकेत है। आमतौर पर सुबह तेज सिरदर्द होता है। कई बार लोग माइग्रेन समझ कर इसकी अनदेखी करते हैं। सैरिब्रल में ट्यूमर हो तो शरीर का संतुलन बनाए रखने में यह बाधा पैदा करता है। पराइअटल लोब में ट्यूमर होने पर व्यक्ति को दैनिक क्रिया-कलापों में भी परेशानी पैदा होती है। ब्रेन ट्यूमर की बीमारी में मिर्गी की तरह के दौरे पड़ते हैं और बेहोशी की स्थिति पैदा हो जाती है। चेहरे के कुछ हिस्सों में कमजोरी महसूस हो और वजन एकाएक बढ़ जाए तो ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। जब चीजें दो-दो दिखाई दें या फिर गले में अकड़न ज्यादा रहने लगे तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।

बचाव के उपाय

ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए विटामिन-सी सर्वाधिक लाभदायक है। यह मस्तिष्क कैंसर के मरीजों के ट्यूमर को तेजी से खत्म कर सकता है। ब्रेन ट्यूमर से बचाव के बहुत रास्ते ज्ञात नहीं हैं, फिर भी खानपान में रसायनों से जितना बच सकें, बेहतर है। ज्यादा जागने की आदत न बनाएं। नर्वस सिस्टम को परेशानियों से बचाए रखने के लिए भरपूर नींद जरूरी है। विटामिनों और पौष्टिकता से भरपूर आहार लें। विटामिन-सी, विटामिन-के और विटामिन-ई वाले खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान दें। जंकफूड या डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। पानी भरपूर पिएं।

ब्रेन ट्यूमर का इलाज

ब्रेन ट्यूमर का इलाज अलग-अलग तरीके से होता है। ट्यूमर के आकार, स्थिति के आधार पर इलाज किया जाता है। ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में पूरे ट्यूमर को या उसके कुछ भाग को ब्रेन से निकाल दिया जाता है। माइक्रो एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के जरिये सर्जरी को आसान और बेहतर बना दिया गया है। कीमोथैरेपी में ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए दवाइयों के उपयोग से ट्यूमर की कोशिकाओं को खत्म किया जाता है। कीमोथैरेपी की दवाएं गोली के रूप में या नसों में इंजेक्शन द्वारा दी जाती हैं। रेडियो सर्जरी से कैंसर की कोशिकाओं को रेडिएशन की कई बीम्स के उपयोग द्वारा खत्म किया जाता है। यह सर्जरी एक ही सीटिंग में हो जाती है। ब्रेन ट्यूमर का इलाज करने के लिए रेडिएशन थैरेपी में ट्यूमर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए हाई एनर्जी बीम जैसे एक्स-रे या प्रोटॉन्स का उपयोग किया जाता है। 

From around the web