कन्नौज : रायफल और चीता बाइक लूट कांड में सांसद सुब्रत पाठक और उनके सभी साथी सन्देह लाभ पाकर बरी

 

कन्नौज। सपा शासन काल के दौरान कन्नौज शहर में हुए दंगों के दौरान पुलिस कर्मी और एक होमगार्ड द्वारा सदर कोतवाली में भाजपा नेता सुब्रत पाठक व 20 से 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी राइफल लूटने के प्रयास व पुलिस की बाइक लूट ले जाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने गवाहों और साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को सन्देह लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे से बरी होने के बाद भाजपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। 

अक्टूबर 2015 में दो समुदायों के बीच दंगा भडक गया था। उस दौरान भाजपा नेता सुब्रत पाठक समेत कई नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ सदर कोतवाली में अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। जिसमें सुब्रत पाठक समेत सभी आरोपियों ने लम्बे समय तक जेल भी काटी थी। दंगों के दौरान ही कला चौकी क्षेत्र में रात के वक्त गश्त कर रहे चीता मोबाइल के सिपाही राशिद हुसैन द्वारा सदर कोतवाली में सुब्रत पाठक व उनके 20 से 25 साथियों के खिलाफ सरकारी बाइक लूटने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले की सुनवाई जनपद न्यायालय परिसर स्थित एमपी एमएलए फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में चल रही थी। 

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता तरूण चन्द्र और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता यतेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ न तो पुलिस कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह पेश कर पाई और न ही कोई अकाट्य साक्ष्य ही दे पाई। मुकदमा दर्ज कराने वाले हेड कांस्टेबल राशिद हुसैन ने भी न्यायालय में अपने बयान दर्ज कराते हुए कहा कि गश्त के दौरान 23 अक्टूबर की सुबह करीब 3ः30 बजे भीड़ उनकी तरफ आई और उनसे सरकारी राइफल छीनने का प्रयास किया, लेकिन जब राइफल नहीं छीन सके तो चीता मोबाइल की सरकारी बाइक लूट ले गए। 

उन्होंने बयान में कहा कि वह न तो सुब्रत पाठक को पहचानते थे और न ही उनके साथियों को। ऐसे में घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि बाइक सुब्रत पाठक और उनके साथी लूट ले गए जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कराया था हालांकि पुलिस ने तीन दिन बाद ही 26 अक्टूबर को एक खेत से चीता मोबाइल की उस बाइक को बरामद भी कर लिया था। लेकिन वादी राशिद हुसैन व होमगार्ड रामशरण द्वारा मुकदमें की सुनवाई के दौरान आरोपीगणों को पहचानने से इनकार कर दिया गया और उनके खिलाफ कोई गवाह व साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सके। 

संदेह का लाभ देते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश काशिफ शेख ने भाजपा सांसद सुब्रत पाठक और उनके साथियों अजीत उर्फ पप्पू, सौरभ कटियार, कन्हैया लाल, रामजी मिश्रा, लालू यादव, अमित उर्फ अल्टर, नितिन दुबे, प्रमोद कुमार, उमेश बाथम, रामू यादव, अरविंद उर्फ मोटू, विक्रम त्रिपाठी, अवधेश कुमार राठौर, पुष्कर मिश्रा, दुल्ली अग्निहोत्री उर्फ संदीप, राहुल कुशवाहा को मुकदमा अपराध संख्या 1029/2015 के अंतर्गत धारा 147, 353, 395, 504, 506 में दोषमुक्त कर दिया। मामले में दोषमुक्त होते ही भाजपा नेताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। 

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