कानपुर : सरकारी नौकरी दिलाने वाले अन्तरराज्यीय ठग गिरोह के छह शातिर गिरफ्तार

 
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कानपुर। सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गैंग को कानपुर की क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ करने में सफलता मिली है। गैंग के सदस्य बेरोजगारों को झांसा देकर फांसते थे और लाखों रुपये ऐंठने के बाद फर्जी प्रपत्र भी बनाकर थमा देता था। क्राइम ब्रांच ने गिरोह के 06 सदस्यों को दबोचते हुए खुलासा किया और पकड़े गए अभियुक्तों से पुलिस पूछताछ कर रही है।

ऐसे खुला मामला

क्राइम ब्रांच के डीसीपी सलमान ताज पाटिल ने मंगलवार को पुलिस लाइन में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। बताया कि थाना चकेरी निवासी प्रिया निषाद ने पुलिस को बताया स्वरूप नगर निवासी अंकुर वर्मा ने जुलाई 2020 में रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर मुझसे चार लाख रुपये लिए थे। इसके बदले मुझे आई कार्ड व ज्वाइनिंग लेटर भी दिया था। साथ ही कहा था कि कोरोना खत्म होने के बाद ज्वाइनिंग हो जाएगी। लेकिन जब मैं नार्थ सेन्ट्रल रेलवे में ज्वांइन करने पहुंची तो सारा मामला फर्जी निकला।

पद के हिसाब से तय था पैसा

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि ठगी करने वाला गिरोह आर्मी, नेवी, एयर फोर्स, सचिवालय, रेलवे, सीबीआई, पुलिस, ऑर्डिनेंस आदि विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगार युवकों को झांसे में लेता था। इसके लिए अलग-अलग पद के लिए अलग रेट तय कर रखे थे। चपरासी से लेकर अफसर तक तीन लाख से दस लाख रुपये तक के रेट तय कर रखे थे।

कई राज्यों में है ठगी का नेटवर्क

ठगी करने वाले गैंग के तार न केवल यूपी में बल्कि पंजाब और हरियाणा राज्यों में भी फैले हैं। गैंग अपने सदस्यों के माध्यम से अब तक सैकड़ों लोगों को चूना लगा चुका है। गैंग के गुर्गो ने ठगी का जाल लोगों के माध्यम से और सोशल नेटवर्क से फैला रखा था। अभियुक्त सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव थे।

आधा दर्जन अभियुक्त गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच के डीसीपी ने बताया कि अभियुक्तों की पहचान अशोक कुमार निवासी टीपी नगर,महताब अहमद निवासी आईआईटी गेट कल्याणपुर, धर्मेन्द्र कुमार निवासी मसवानपुर कल्याणपुर,अंकुर वर्मा निवासी राजपुरवा नियर जेके मंदिर, अक्षय सिंह निवासी नानकारी आईआईटी, प्रदीप सिंह निवासी अर्मापुर कानपुर के रूप में हुई। इसमें प्रदीप सिंह आर्डिनेंस फैक्ट्ररी कर्मचारी है।

शक न हो इसके लिए कराते थे ट्रेनिंग

आर्डिनेंस फैक्ट्री कर्मचारी प्रदीप सिंह लोगो को धोखा देने के लिए नियुक्ति पत्र देकर उन्हें ट्रेनिंग पर अर्मापुर बुला लेता था। यहां के आर्मापुर मैदान में लोगों को फिजिकल ट्रेनिंग देता था ताकि किसी को भी गैंग द्वारा की जा रही ठगी का अहसास ना हो सके।

यह हुई बरामदगी

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि चार सेवा पुस्तिका,कुछ अभ्यार्थियों के आधार कार्ड व शैक्षिक प्रमाणपत्रोंकी छाया प्रति, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के फर्जी प्रमाण पत्र ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के फर्जी प्रपत्र, आर्मी के फर्जी प्रपत्र इंडियन रेलवे के फर्जी प्रपत्र, भारतीय खाद्य निगम के फर्जी प्रपत्र, विभिन्न विभागों के फर्जी आईकार्ड व मोहरे, दो हार्ड डिक्स जिसमें संपूर्ण डेटा बरामद किया गया है।

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