लखनऊ में करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के 5 और बदमाश गिरफ्तार, बैंक खातों से रकम लूट लेते थे 

 
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लखनऊ,- उत्तर प्रदेश में लखनऊ के हजरगंज कोतवाली में दर्ज साइबर ठगी मामले में फरार चल रहे गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों को आज साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस प्रवक्ता ने यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल एक समीक्षा अधिकारी ने अपने बैंक खाते से नेट बैंकिंग के माध्यम से 53 लाख रुपये निकलने का मामला कोतवाली हरतगंज में दर्ज कराया था। इस मामले में साइबर सेल ने झारखण्ड के दुमका जिले की पुलिस के सहयोग से साइबर ठगी करने वाले 11 अभियुक्तों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि यह गिरोह अब तक विभिन्न राज्यों में करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।
उन्होंने बताया कि इस ठगी के मामले में साइबर सेल प्रभारी मथुरा राय के नेतृत्व में एक टीम ने फरार गिरोह के मास्टरमाइंड विजय मण्डल उर्फ प्रमोद और उसके चार साथियों को आज गिरफ्तार कर लिया  है। उन्होंने बताया कि विजय मण्डल को दिल्ली में गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में झारखण्ड दुमका निवासी विजय मण्डल के अलावा इसके भाई मनोज मण्डल, रिश्तेदार राजेश मण्डल, करन मण्डल और जितेन्द्र मण्डल शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लाख 20 हजार की नकदी और छह मोबाइल फोन बरामद किए गये। ये लोग पिछले छह साल से साइबर ठगी कर रहे थे।
प्रवक्ता ने बताया कि गिरोह  के सदस्य अलग-अलग काम करते थे। जैसे फर्जी सिम व फर्जी खाते उपलब्ध कराने का काम मनोज करता था जबकि जितेन्द्र पुलिस की गतिविधियों की जानकारी रखता था। इसके अलावा राजेश ग्राहकों को कॉल करता था और करन खातों से रुपये निकलवाने की जिम्मेदारी संभालता था। उन्होंने बताया कि विजय मण्डल मजूदरों से सम्पर्क कर उनके दस्तावेज लेकर खाता खुलवा लेता था। कई मजदूरों को तो पता भी नहीं चलता था कि उनके नाम से खाता खुला है। फिर इन खातों में ही ठगी की रकम स्थानान्तरित करवा कर निकाल लेते थे। गिरोह सरगना मजदूरों की पासबुक व एटीएम  अपने पास ही  रखता था।
उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य बैंकों के एप की खामियों का फायदा उठाते थे। पूछताछ पर ठगी के नये तरीके सामने आये हैं। उन्होंने बताया कि एसबीआई के खाताधारकों को ये लोग कॉल कर उन्हें बातों में उलझा कर ओटीपी मांग लेते थे। इससे इंटरनेट बैंकिंग चालू कर लेते। नेट बैंकिंग के जरिये सम्बन्धित खाते में एसबीआई स्क्योर एप रजिस्टर्ड करते। इस एप में एक ही बार ओटीपी की जरूरत पड़ती है। इसका फायदा उठाकर लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन कर लेते थे।
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा बैंक आफ बडौदा के बड़ौदा एम पासबुक एप पर भी ये लोग एक ही सीरीज के मोबाइल नम्बर डालते थे। जिस नम्बर को डालने पर ओटीपी चला जाता, उससे यह पता चल जाता था कि इस नम्बर वाले व्यक्ति का खाता इसी बैंक में है। इस नम्बर पर कॉल करके खुद को बैंक कर्मचारी बताते। उसे बातों में फंसा कर ओटीपी पता कर लेते थे। इसके बाद रुपये मजदूरों के खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। उन्होंने बताया कि हीरो फाइनेंस एप में ये लोग ग्राहक की आईडी की एक सीरीज डालते थे। इसमें बकाया दिख जाता है। जिसका ज्यादा बकाया दिखता, उस ग्राहक को कॉल करके छूट देने का ऑफर देकर फिर उससे सम्पर्क कर ठगी कर लेते। गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि गिरोह के लोग  सचिवालय, पुलिस व अन्य सरकारी विभागों के रिटायर अधिकारी और कर्मचारी के मोबाइल नम्बर पता कर लेते थे। फिर इनमें ऐसे लोगों को चिन्हित करते जिन्हें इंटरनेट बैंकिग के बारे में ज्यादा नहीं पता रहता। ऐसे लोगों को अधिक ब्याज देने का लालच देकर उनसे ओटीपी पता करते, फिर उनके नाम से एफडी कराकर उस पर लोन ले लेते। लोन की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर हड़प लेते थे।

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