2 जुलाई से होगी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की परीक्षा, 27 अगस्त तक 4 पालियों में होंगे पेपर 

 
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक अंतिम और परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय की परीक्षा दो जुलाई से 27 अगस्त तक चलेगी। कोविड को देखते हुए इस बार भी प्रश्नों की संख्या और समय कम की जा रही है। इससे एक दिन में चार पालियों में परीक्षा कराई जाएगी।
इस बार छात्र-छात्राओं को परीक्षा में डेढ़ घंटे का समय दिया जाएगा। प्रश्नपत्र में प्रश्नों की संख्या भी आधी रहेगी। वहीं, इस बार प्रायोगिक परीक्षा नहीं होगी। लिखित परीक्षा के अंक के आधार पर प्रायोगिक परीक्षा में भी अंक दिए जाएंगे। मौखिक परीक्षा कराई जाएंगी, इसे कालेज ऑनलाइन भी कर सकेंगे। विश्वविद्यालय स्नातक दूसरे वर्ष की भी परीक्षा कराएगा। विश्वविद्यालय ने जो परीक्षा कार्यक्रम बनाया है। उस पर 15 जून को होने वाली परीक्षा समिति की मुहर लगनी बाकी है।
परीक्षा का यह होगा समय
सुबह 7.00 बजे 8.30 बजे
9.30 से 11.00 बजे बजे
12.00 से 1.30 बजे
2.30 से 4.00 बजे तक।
विश्वविद्यालय की विषम सेमेस्टर की परीक्षा पहले हुई थी। उसकी मूल्यांकन प्रक्रिया रुकी हुई है। अब जब कॉलेजों में ग्रीष्मकालीन छुट्टी शुरू हो गई है। वैसे में विश्वविद्यालय मूल्यांकन की तैयारी में भी जुट गया है। ग्रीष्मकालीन छुट्टी को देखते हुए रेगुलर शिक्षक मूल्यांकन में कम आ सकते हैं। ऐसे में सेल्फ फाइनेंस कालेजों के शिक्षक लगाएं जा सकते हैं।


नई शिक्षा नीति को लेकर सीसीएसयू सबसे आगे
सीसीएसयू मेरठ नई शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। प्रदेश सरकार से जो न्यूनतम पाठ्यक्रम मिला था, स्थानीय स्तर पर 30 फीसद संशोधन के बाद विश्वविद्यालय ने उसे स्वीकार लिया है। 15 जून को विद्वत परिषद की बैठक के बाद सत्र 2021-2022 से नई शिक्षा नीति लागू की जाएगी। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों ने शासन को अपनी रिपोर्ट भेजी है, जिसमें उन्होंने नई शिक्षा नीति के तहत न्यूनतम पाठ्यक्रम लागू करने की जानकारी दी है। सीसीएसयू ने बताया है कि उसके अधिकांश विषयों की बोर्ड ऑफ स्टडीज हो चुकी है। वह सत्र 2021 से इसे लागू करेगा। वहीं, गोरखपुर, लखनऊ सहित कई राज्य विश्वविद्यालयों में अभी धीमी प्रक्रिया है। कुछ जगह न्यूनतम पाठ्यक्रम को अभी स्वीकार नहीं किया गया है। कई ने अभी तक बोर्ड आफ स्टडीज भी नहीं की है। एक साथ सभी विश्वविद्यालयों में न्यूनतम पाठ्यक्रम नहीं लागू किए जाने से नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने की चुनौती बन सकती है।

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