कोरोना को दे दी मात लेकिन अन्य बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग

 
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मेरठ। कोरोना से स्वस्थ होने के बाद भी कई तरह के लक्षणों से पीड़ित मरीजों में बुजुर्गों की संख्या काफी अधिक है। मेडिकल में पिछले दो सप्ताह में कई ऐसे बुजुर्ग मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं जो कोरोना से ठीक हो गए थे, लेकिन बाद में तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है। मेडिकल के प्रोफेसर डॉक्टर टी एस आर्य ने बताया कि पिछले 15 दिनों में उन्होंने सात ऐसे मरीजों का इलाज किया है, जो कोरोना से स्वस्थ होने के बाद चलने फिरने में भी सक्षम नहीं थे। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए फिजियोथेरेपिस्ट, डायटीशियन और मनोचिकित्सक की सलाह ले रहे हैं। 


कोरोना से ठीक हो गए लेकिन बेड से उठ नहीं पाते और पीठ में जख्म हो गए
65 वर्षीय रमेश जून में कोरोना संक्रमित होने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे। वहां से ठीक होने के बाद वे घर लौट आए। फेफड़े ठीक थे और सांस की भी कोई दिक्कत नहीं महसूस हो रही, लेकिन उनकी मांशपेशियां बुरी तरह सूख गईं। इस वजह से वे बेड से भी उठ पाने में असमर्थ थे। लगातार लेटे रहने से उनकी पीठ में घाव हो गया था। इतना ही नहीं, उनकी याददाश्त भी चली गई थी। वे अपने करीबी लोगों के नाम भी भूलने लगे थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को पेशाब की नली डालनी पड़ी, धीरे-धीरे खाना शुरू किया। फिजियोथेरेपी कराने के बाद उनकी तबीयत में सुधार आ गया। इसके बाद भी रमेश मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे। उनका किसी से बात करने में मन नहीं लगता था तो मनोचिकित्सक की मदद से कॉउंसलिंग कराई गई। अब वे बेहतर महसूस कर रहे हैं।


डायट और फिजियोथेरेपी का रोल अहम

डॉक्टर वीरेंद्र खोखर के मुताबिक ऐसे बुजुर्गों के लिए डायट और फिजियोथेरेपी की भूमिका अहम है। इन लोगों को परिवार के सहयोग की भी बहुत जरूरत होती है। ऐसे लोग खाने में प्रोटीनयुक्त चीजे जैसे चिकन, मछली, अंडा, पनीर, सोयाबीन, बादाम आदि को शामिल करें। इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इससे मांसपेशियां तेजी से रिकवर होती हैं। डॉक्टर खोखर ने बताया कि कोविड के बाद रोगियों के मुंह का स्वाद खराब हो जाता है या उन्हें खाना निगलने में दिक्कत होती है, ऐसे लोगों को भोजन से पहले सूप और साथ में दही परोसा जा सकता है।


बुजुर्गों में ठीक होने के बाद ये समस्याएं आ रहीं
मांसपेशियों का सुख जाना : बुजुर्ग मरीजों में सबसे अधिक यह समस्या देखी जा रही है। ऐसे मरीज चलने-फिरने में भी असमर्थ हो जाते हैं।
भूख बेहद कम हो जाना : कोरोना वायरस शरीर के मेटाबोलिज्म पर भी असर करता है। खाना न पचना और भूख न लगना जैसे लक्षण भी आ सकते हैं।


फैसला लेने या समझने में दिक्कत

कोरोना से दिमाग भी पर प्रभावित होता है। कोरोना से ठीक हुए मरीजों में ब्रेन फॉग के मामले देखे जा सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता।
नींद में बदलाव : कोरोना से ठीक होने के बावजूद नींद न आना या अधिक नींद आने जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
पेशाब में जलन : पेशाब में जलन महसूस हो सकती है या फिर कुछ लोगों को पेशाब न आने की समस्या हो सकती है।

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